

नाथल दाई मंदिर निर्माण का हुआ भूमि पूजन, प्राचीन लोक आस्था के केंद्र को भव्य स्वरूप देने का संकल्प
500 वर्ष से अधिक पुरानी लोक मान्यता से जुड़े नाथल दाई धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, महाआरती, हनुमान चालीसा पाठ एवं महाभंडारे का हुआ आयोजन
अंबिकापुर। ग्राम बेनीपुर स्थित प्राचीन एवं लोक आस्था के केंद्र माता नाथल दाई मंदिर परिसर में गुरुवार को धार्मिक अनुष्ठान एवं मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर आसपास की कई ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ग्रामीण पहुंचे और धार्मिक आयोजन में सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह सात बजे छह बैगाओं द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुआ। ग्रामीण अपने-अपने घरों से अक्षत एवं पुष्प लेकर पहुंचे और माता नाथल दाई को अर्पित किए। बैगाओं द्वारा लंबे समय तक पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अनुष्ठान संपन्न कराया गया।
पूजा-अर्चना के पश्चात माता नाथल दाई की महाआरती एवं हनुमान चालीसा पाठ किया गया। इसके बाद मां महामाया की आरती भी संपन्न हुई। महाआरती में प्रमुख रूप से भारत सिंह सिसोदिया, अनुराग सिंह देव, जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह एवं मेजर अनिल सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भूमि पूजन कर मंदिर निर्माण की शुरुआत
महाआरती के पश्चात जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह द्वारा मंदिर निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन किया गया और पांच फावड़े चलाकर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। नाथल दाई सेवा समिति के सदस्यों एवं कार्यकर्ताओं ने इस प्राचीन धार्मिक स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया।
आयोजन में आसपास की आठ से दस ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में सहभागिता के बाद महाभंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम के समापन पर मंदिर परिसर के मुख्य द्वार पर विशाल ध्वज तथा परिसर के चारों कोनों पर चार ध्वज स्थापित किए गए। ध्वज स्थापना के बाद पूरा मंदिर परिसर धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो उठा।
500 वर्ष से अधिक पुरानी लोक मान्यता
विश्व हिंदू परिषद सरगुजा के जिलाध्यक्ष विनीत गुप्ता ने बताया कि ग्राम बेनीपुर में माता नाथल दाई के प्राचीन मंदिर के अवशेष आज भी मौजूद हैं तथा यहां बाउंड्रीवाल भी निर्मित है। प्राचीन समय से ही इस स्थल पर बैगा, गुनिया, देवार एवं ग्रामीणों द्वारा पूजा-अर्चना की जाती रही है। लोक मान्यता के अनुसार गांवों में होने वाले पारंपरिक पूजा-पाठ में माता नाथल दाई को माता कामाख्या के लघु स्वरूप के रूप में भी पूजित माना जाता है।
हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक आलोक सिंह ने कहा कि सरगुजा की लोक संस्कृति में देवी-देवताओं से जुड़े अनेक ऐसे स्थल हैं, जिनका इतिहास केवल पत्थरों और शिलालेखों में ही नहीं, बल्कि लोकगीतों, बुजुर्गों की स्मृतियों, पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही मान्यताओं और जनआस्था में सुरक्षित है। नाथल दाई भी इसी लोक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
ग्रामीणों एवं बुजुर्गों के अनुसार यह स्थल करीब 500 वर्ष से अधिक पुराना है। लोक मान्यता में माता नाथल दाई को चंद्रहासिनी देवी की बहन तथा मां कामाख्या की छोटी बहन के रूप में पूजित माना जाता है। सरगुजा सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में बैगा, गुनिया एवं देवार समुदाय द्वारा पारंपरिक पूजा-पाठ के दौरान मां महामाया और चंद्रहासिनी देवी के साथ नाथल दाई का भी आह्वान किए जाने की परंपरा बताई जाती है।
भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प
नाथल दाई सेवा समिति ने प्राचीन लोक आस्था से जुड़े इस स्थल को भव्य मंदिर के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने कहा कि मंदिर निर्माण के माध्यम से इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल को संरक्षित करने के साथ आने वाली पीढ़ियों तक इसकी लोक परंपरा और आस्था को पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में अनुज दुबे, जनमेजय मिश्रा, निलेश सिंह, रूपेश दुबे, सेवा समिति अध्यक्ष अर्जुन पटेल, उपाध्यक्ष सतीश यादव, सचिव एवं सरपंच हरिशंकर, ननका बैगा, पंडा ललन प्रसाद, चंदर यादव, सुखलाल राजवाड़े, राजू यादव, भदर यादव, धनसी, राम आशीष, डिलेश्वर पैकरा, ललित रजवाड़े, नंदकेश्वर रजवाड़े, बुधन राम पैकरा, बरन राम, ननका यादव, कुमार राम, जितेंद्र सिंह, कन्हैया लाल, सरपंच ननका, रामकुमार यादव, कृष्णा यादव, मनोहर राम, चंभू लाल, रामनारायण, हरि प्रसाद, बद्री नारायण, नरेश राम, छत्रपाल सिंह, शिवचरण पावले, नान साय, सीताराम, चंद्रदेव, विजय मानिकपुरी, केशव प्रसाद, बालेश्वर राजवाड़े, राम प्रवेश पांडेय, अजू बख्शी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
नाथल दाई सेवा समिति ने कहा कि मंदिर निर्माण का यह प्रयास केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही लोक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
Author: Chhattisgarhiya News
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