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मैनपाट के बरिमा में बॉक्साइट खनन को लेकर किसानों में आक्रोश, सीएमडीसी पर लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी खनन का आरोप

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मैनपाट के बरिमा में बॉक्साइट खनन को लेकर किसानों में आक्रोश, सीएमडीसी पर लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी खनन का आरोप

मैनपाट। ग्राम बरिमा, तहसील मैनपाट में बॉक्साइट खनन को लेकर प्रभावित भू-स्वामियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिन भूमि खसरों को बॉक्साइट उत्खनन के लिए 7 वर्षों की अवधि के लिए छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सीएमडीसी) को दिया गया था, उनकी अनुबंध अवधि वर्ष 2024 में समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद पिछले करीब दो वर्षों से संबंधित भूमि से बॉक्साइट उत्खनन एवं परिवहन किए जाने का आरोप है।

प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार, राजस्व प्रकरण क्रमांक 01/अ-82/2014-15 में दिनांक 04 जनवरी 2017 को संबंधित भूमि सात वर्षों के लिए बॉक्साइट उत्खनन हेतु कंपनी को दी गई थी। इसमें भूमि का उपयोग समाप्त होने के बाद उसे मूल स्वरूप में भू-स्वामियों को वापस किए जाने की शर्त का भी उल्लेख किया गया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन के बाद भूमि को उसके मूल स्वरूप में वापस नहीं किया गया है। वहीं, प्रभावित भू-स्वामियों को फसल एवं भूमि मुआवजा राशि भी अब तक प्राप्त नहीं होने की बात कही गई है।

350 ट्रक बॉक्साइट निकालने का आरोप

ग्रामीणों ने दावा किया है कि पिछले दो वर्षों के दौरान संबंधित खसरा नंबरों की भूमि से बिना वैधानिक अधिकार लगभग 350 ट्रक बॉक्साइट निकालकर परिवहन एवं विक्रय किया गया है। प्रभावित किसानों ने उक्त बॉक्साइट की कीमत तत्काल उन्हें दिलाए जाने तथा भविष्य में उनकी भूमि से होने वाले कथित अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी भूमि को केवल फसल मुआवजे के आधार पर आगे बॉक्साइट खनन के लिए दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं।

जनसुनवाई के वादों और जमीनी हकीकत में अंतर का आरोप

प्रभावित किसानों का कहना है कि बॉक्साइट परियोजना को लेकर आयोजित जनसुनवाई के दौरान सीएमडीसी की ओर से स्थानीय लोगों और प्रभावित भू-स्वामियों के हितों को लेकर विभिन्न आश्वासन दिए गए थे, लेकिन वर्तमान स्थिति में जनसुनवाई के दौरान किए गए वादों और जमीन पर दिखाई दे रही हकीकत में काफी अंतर नजर आ रहा है। इससे प्रभावित किसानों में असंतोष और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, खनन की वैधानिक स्थिति एवं लीज अवधि की जांच करने, संबंधित खसरा नंबरों का भौतिक सत्यापन कराने तथा कथित रूप से निकाले गए बॉक्साइट की मात्रा और उसकी बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।

परिवहन रोकने की चेतावनी

मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में प्रभावित भू-स्वामियों ने ग्राम बरिमा स्थित सीएमडीसी के कांटाघर के पास बॉक्साइट परिवहन रोकने के लिए आंदोलन करने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि स्थिति को गंभीरता से लेते हुए समय रहते उचित कार्रवाई की जाए, ताकि विवाद और न बढ़े।

प्रभावित ग्रामीणों में जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग सहित कुंजबिहारी यादव, तिलक साय, नानसाय, जहरसाय, चुन्नीलाल, लक्ष्मण, कार्तिक, सुमन नाग, रामचरण, परसराम, नान्ही, सत्यनारायण, यशोदा बाई, सुनील एवं ठुईया सहित अन्य भू-स्वामी शामिल हैं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भूमि की वैधानिक स्थिति, लीज/अनुबंध की अवधि, खनन की अनुमति, निकाले गए बॉक्साइट की मात्रा, मुआवजा तथा भूमि को मूल स्वरूप में वापस करने की शर्त की जांच कर प्रभावित किसानों को न्याय दिलाया जाए।

अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत और आरोपों पर जिला प्रशासन किस स्तर पर संज्ञान लेता है और कथित अवैध खनन एवं परिवहन के मामले में क्या कार्रवाई करता है।

Chhattisgarhiya News
Author: Chhattisgarhiya News

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