

ढोढ़ी के दूषित पानी से बुझ रही प्यास, सरकारी दावों की खुली पोल
ग्राम बिजली चट्टान के पहाड़ी कोरवा परिवार आज भी स्वच्छ पेयजल से वंचित, स्थायी व्यवस्था की मांग
अंबिकापुर/सीतापुर। सरकार द्वारा हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावों के बीच सीतापुर क्षेत्र के ग्राम बिजली चट्टान की पहाड़ी कोरवा बस्ती की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। बस्ती के ग्रामीण आज भी ढोढ़ी के दूषित पानी के सहारे अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार बस्ती में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण ढोढ़ी का पानी पीने, खाना बनाने और रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल करना पड़ रहा है। दूषित पानी के कारण ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की भी चिंता बनी रहती है।
एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा हर घर जल, स्वच्छ पेयजल और जनजातीय क्षेत्रों के विकास को लेकर लगातार दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के परिवार आज भी बुनियादी सुविधा के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर हैं। इससे सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में विकास की योजनाएं दौड़ रही हैं, लेकिन बिजली चट्टान की पहाड़ी बस्ती तक स्वच्छ पानी की सुविधा अब तक नहीं पहुंच सकी है। आजादी के दशकों बाद भी यदि लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो यह विकास के दावों की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है।
जनजातीय ग्रामीण अजय राम, सोमार साय, बंधनु राम, सनी राम, घुरसाय, नई हारो बाई, अंजना बाई, मनियारी बाई, धनेश्वर राम, संजय राम, कुंवर साय, दिनेश राम, सीताराम, नान साय, सुखमतिया बाई सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से बस्ती का तत्काल निरीक्षण कर स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता से लेते हुए जल्द आवश्यक कार्रवाई करेगा, ताकि उन्हें दूषित पानी पर निर्भर न रहना पड़े।
Author: Chhattisgarhiya News
सच्ची बात सिर्फ छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के साथ











