

त्योहारों से पहले चीनी की मिठास में मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट : परवेज आलम गांधी
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों और बाजार में घटती उपलब्धता को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि जिस देश को दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में गिना जाता है, वहां चीनी का स्टॉक चिंताजनक स्तर तक पहुंचना और विदेश से चीनी आयात करने की नौबत आना केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े करता है।
परवेज गांधी ने कहा कि त्योहारों की मिठास पर महंगाई की मार पड़ रही है। अंबिकापुर में चीनी की कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ गरीब, मध्यमवर्गीय परिवारों, मिठाई कारोबारियों और छोटे दुकानदारों का बजट प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि जब चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर संभावित संकट का अंदाजा था, तो समय रहते पर्याप्त घरेलू स्टॉक सुनिश्चित क्यों नहीं किया गया?
कांग्रेस नेता ने सरकार से पूछे तीन सवाल
परवेज आलम गांधी ने कहा कि सरकार को जनता के सामने तीन सवालों का जवाब देना चाहिए—
देश में चीनी का स्टॉक निचले स्तर तक कैसे पहुंचा और 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की आवश्यकता क्यों पड़ी?
चीनी की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जब घरेलू उपलब्धता को लेकर चीनी आयात की जरूरत पड़ रही है, तो गन्ने और अन्य कृषि उपज के उपयोग तथा Ethanol उत्पादन से जुड़ी नीतियों की खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है?
उन्होंने कहा कि एक तरफ ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा दिया जाता है और दूसरी तरफ आवश्यक खाद्य वस्तु चीनी का आयात करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर अब केवल अर्थव्यवस्था के आंकड़ों में नहीं, बल्कि आम आदमी की रसोई और त्योहारों की थाली में दिखाई दे रहा है।
परवेज गांधी ने कहा कि गन्ने का उपयोग चीनी और Ethanol उत्पादन में किस अनुपात में हो, इसका निर्धारण केवल पेट्रोल में मिश्रण के लक्ष्य के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। खाद्य सुरक्षा, चीनी की घरेलू उपलब्धता, किसानों की आय और उपभोक्ताओं की जेब—इन सभी पहलुओं को समान महत्व दिया जाना चाहिए।
जमाखोरी पर सख्ती की मांग
कांग्रेस नेता ने सरगुजा जिला प्रशासन से चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय यदि कोई व्यापारी कृत्रिम कमी पैदा कर मनमाने दाम वसूल रहा है, तो प्रशासन को बाजार की जांच कर ऐसे लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी और नारों से बाहर निकलकर जनता को जवाब देना चाहिए। “पहले उत्पादन और स्टॉक का संकट, फिर कीमतों में उछाल और अब विदेश से आयात—आखिर यह किसकी नीति और किसकी नाकामी है?”
उन्होंने केंद्र सरकार से चीनी की कीमतों पर तत्काल नियंत्रण के प्रभावी उपाय करने, पर्याप्त घरेलू स्टॉक सुनिश्चित करने तथा Ethanol नीति के खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा करने की मांग की।
Author: Chhattisgarhiya News
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