

सुअर फार्म सकालो में बाउंड्रीवाल निर्माण में कथित अनियमितता पर FIR दर्ज, ठेकेदार समेत 10 के खिलाफ मामला
अंबिकापुर। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के अंतर्गत ग्राम सकालो स्थित सुअर फार्म में वर्ष 2019 से 2024 के बीच कराए गए बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य में कथित अनियमितता, गुणवत्ताहीन निर्माण, शासकीय राशि के गलत भुगतान और मिलीभगत के आरोपों पर गांधीनगर थाना पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद अपराध दर्ज किया है। मामले में ठेकेदार सहित ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के तत्कालीन एवं संबंधित अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
प्राप्त FIR के अनुसार, गांधीनगर थाना में अपराध क्रमांक 385/2025 दिनांक 8 जुलाई 2025 को दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला कायम कर विवेचना शुरू की है। FIR में घटना की अवधि 29 जुलाई 2019 से 9 मई 2024 तक बताई गई है।
16.75 लाख रुपये की लागत से होना था निर्माण
परिवादी रोहित सिंह, निवासी गोधनपुर, अंबिकापुर द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद के मुताबिक सकालो सुअर फार्म में बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग अंबिकापुर द्वारा तकनीकी स्वीकृति क्रमांक 11 दिनांक 29 जुलाई 2019 को प्रदान की गई थी। कार्य का ऑनलाइन टेंडर क्रमांक 62238 बताया गया है। ठेका मेसर्स आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर दीपांशु राज को 30.35 प्रतिशत कम दर पर दिया गया था और लगभग 16.75 लाख रुपये की लागत से करीब 450 मीटर बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जाना था।
परिवादी ने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से प्राक्कलन और वास्तविक निर्माण में अंतर रखते हुए शासकीय राशि का अनुचित भुगतान किया गया।
12 एमएम की जगह 10 एमएम सरिया लगाने का आरोप
शिकायत में आरोप है कि बाउंड्रीवाल के प्लींथ बीम के नीचे कॉलम में मानक के अनुसार 12 एमएम सरिया लगाया जाना था, लेकिन मौके पर 10 एमएम का सरिया लगाया गया। इसके बावजूद माप पुस्तिका में 12 एमएम का उल्लेख कर भुगतान किए जाने का आरोप है।
शिकायतकर्ता के अनुसार विभागीय जांच में भी इस अनियमितता की पुष्टि हुई तथा राशि वसूली की अनुशंसा की गई थी। हालांकि शिकायतकर्ता का दावा है कि विभागीय जांच में वास्तविक स्थिति की तुलना में कम कॉलम दर्शाए गए।
कॉइल तार के कार्य में भी भारी अंतर का आरोप
परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि मूल निविदा के प्राक्कलन में कॉइल तार का कार्य शामिल नहीं था, लेकिन बाद में प्राक्कलन में बदलाव कर लगभग 60 हजार रुपये के कार्य को 7.17 लाख रुपये तक पहुंचाया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक विभागीय जांच में करीब 4.52 लाख रुपये के अधिक भुगतान की बात सामने आई थी।
इसके अलावा निर्माण कार्य में डीपीसी, प्लास्टर, पोलाई, मुरूम भराई, प्लींथ बीम और कंटीले तार सहित कई कार्यों में प्राक्कलन के अनुरूप काम नहीं होने के आरोप लगाए गए हैं।
जांच रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल
परिवादी ने आरोप लगाया कि मौके पर जांच के दौरान कई कमियां सामने आने के बावजूद अंतिम जांच प्रतिवेदन में उनका उल्लेख नहीं किया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि जांच के दौरान बनाए गए पंचनामे में कई बिंदुओं का उल्लेख था, लेकिन उपलब्ध कराई गई प्रति में सभी बिंदु शामिल नहीं थे।
शिकायतकर्ता ने निर्माण स्थल की स्थिति से संबंधित वीडियो फुटेज को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित होने की बात भी न्यायालय के समक्ष कही है।
इन अधिकारियों और ठेकेदारों को बनाया गया आरोपी
FIR/परिवाद में मेसर्स आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर दीपांशु राज के अलावा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा से जुड़े तत्कालीन अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें उपेंद्र सिंह सेंगर, विवेक प्रताप सिंह राठौर, आर.पी. कुटार, डी.के. मिंज, शैलेंद्र भारती, अविनाश राज सिन्हा, जी.एम. सिंह, मानस गुप्ता और फरहत खान शामिल हैं।
पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद प्रकरण दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। अब जांच में निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता, माप पुस्तिका, भुगतान संबंधी दस्तावेज, स्वीकृत प्राक्कलन, टेंडर प्रक्रिया, विभागीय जांच रिपोर्ट तथा मौके पर हुए वास्तविक निर्माण की जांच की जाएगी।
गौरतलब है कि FIR में लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं। आरोपों की पुष्टि विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
Author: Chhattisgarhiya News
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