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मनरेगा को कमजोर कर मोदी सरकार ग्रामीण भारत की रीढ़ तोड़ रही है – परवेज़ आलम गांधी

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मनरेगा को कमजोर कर मोदी सरकार ग्रामीण भारत की रीढ़ तोड़ रही है – परवेज़ आलम गांधी

अंबिकापुर, 1 जुलाई। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने आरोप लगाया है कि केंद्र की भाजपा सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लगातार कमजोर कर ग्रामीण भारत के करोड़ों गरीब परिवारों के रोजगार, सम्मान और आजीविका पर सीधा प्रहार कर रही है। उन्होंने कहा कि एक ओर नई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर मनरेगा के बजट में कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी और प्रशासनिक बाधाओं के कारण योजना का प्रभाव कम किया जा रहा है।

परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि मनरेगा कांग्रेस की दूरदर्शी सोच और सामाजिक न्याय की अवधारणा का परिणाम है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों लोगों को रोजगार की गारंटी देकर आर्थिक सुरक्षा प्रदान की। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से जल संरक्षण, तालाब निर्माण, ग्रामीण सड़क, सिंचाई, भूमि सुधार और अन्य स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। कोरोना महामारी के दौरान जब लाखों प्रवासी मजदूर अपने गांव लौटे थे, तब मनरेगा ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बनी।

उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च 2026 तक विभिन्न राज्यों का 17,144.13 करोड़ रुपये से अधिक का मनरेगा भुगतान लंबित है, जो केंद्र सरकार की गरीब मजदूरों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका, बच्चों की शिक्षा, बुजुर्गों के इलाज और घर-परिवार के खर्च से जुड़ा गंभीर विषय है। समय पर भुगतान नहीं होना मजदूरों की मेहनत का अपमान है।

परवेज़ गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार एक ओर गरीब कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, जबकि दूसरी ओर मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना को संसाधनों के अभाव में कमजोर किया जा रहा है। राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना, भुगतान में देरी करना और कार्यों की स्वीकृति में बाधाएं उत्पन्न करना संघीय ढांचे की भावना के विपरीत है। इससे ग्रामीण विकास प्रभावित होगा और लाखों परिवार रोजगार के अवसरों से वंचित होंगे।

उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और कृषि संकट के बीच मनरेगा को और मजबूत करने की आवश्यकता थी। जून माह में सामान्य से कम वर्षा और खरीफ बुआई में आई गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में मनरेगा को कमजोर करना गरीब किसानों, खेतिहर मजदूरों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हितों के खिलाफ है।

परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लंबे समय से मनरेगा मजदूरों की दैनिक मजदूरी बढ़ाकर कम से कम 400 रुपये प्रतिदिन करने की मांग करती रही है। उनका कहना है कि वर्तमान मजदूरी दर बढ़ती महंगाई के दौर में श्रमिक परिवारों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि मनरेगा का समस्त लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए, मजदूरी बढ़ाकर न्यूनतम 400 रुपये प्रतिदिन की जाए, योजना का बजट बढ़ाया जाए, राज्यों पर डाला गया अतिरिक्त वित्तीय बोझ समाप्त किया जाए तथा मनरेगा को कमजोर करने वाले सभी प्रावधान तत्काल वापस लिए जाएं।

अंत में परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि गरीबों का अधिकार किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है। कांग्रेस पार्टी किसानों, मजदूरों और ग्रामीण भारत के सम्मान, रोजगार एवं अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करती रही है और आगे भी पूरी मजबूती से उनकी आवाज़ उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा को कमजोर करने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर विरोध किया जाएगा।

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Author: Chhattisgarhiya News

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