

मैनपाट में बॉक्साइट खनन को लेकर गंभीर आरोप, वरिष्ठ समाजसेवी एवं अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
लीज, कथित सहमति पत्र, बॉक्साइट परिवहन, रॉयल्टी और बिक्री की हो स्वतंत्र जांच — राजेश गुप्ता
अंबिकापुर/मैनपाट, 05 सितंबर 2026।
सरगुजा के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में बॉक्साइट खनन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ग्राम बरिमा सहित मैनपाट क्षेत्र में खनन, भूमि उपयोग, कथित सहमति पत्रों और बॉक्साइट के परिवहन को लेकर वरिष्ठ समाजसेवी एवं अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने प्रशासन, सीएमडीसी तथा मां कुदरगढ़ी एल्युमिनियम रिफाइनरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग की है।
राजेश गुप्ता का आरोप है कि स्थानीय आदिवासी भू-स्वामियों की जमीनों पर खनन को लेकर उनकी सहमति और अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उनका दावा है कि बरिमा क्षेत्र में सीएमडीसी को दी गई लीज अवधि वर्ष 2024 में समाप्त होने के बावजूद खनन एवं बॉक्साइट परिवहन जारी रहने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कथित सहमति पत्र की जांच की मांग
अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने 26 दिसंबर 2025 को बरिमा खदान के संबंध में प्रस्तुत कथित सहमति पत्र की जांच की मांग की है। उनका दावा है कि दस्तावेज में करीब 40 ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। वहीं, करीब 50 ऐसे लोगों के हस्ताक्षर होने का भी आरोप है, जो वर्तमान में गांव में निवास नहीं करते।
उन्होंने मांग की है कि कथित सहमति पत्र में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के नाम, पहचान, मृत्यु रिकॉर्ड, मतदाता सूची, निवास एवं भूमि स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
बॉक्साइट की मात्रा, रॉयल्टी और बिक्री का हो ऑडिट
राजेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि मां कुदरगढ़ी एल्युमिनियम रिफाइनरी और सीएमडीसी की गतिविधियों में प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उनका आरोप है कि मैनपाट की बेशकीमती बॉक्साइट संपदा को औने-पौने दाम पर बेचे जाने से शासन को राजस्व का नुकसान हो सकता है।
उन्होंने मांग की कि अब तक निकाले गए बॉक्साइट की वास्तविक मात्रा, रॉयल्टी भुगतान, परिवहन रिकॉर्ड, बिक्री मूल्य, खरीदार कंपनियों तथा संबंधित दस्तावेजों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
ग्रामीणों के विरोध के बीच प्रशासन की भूमिका पर सवाल
अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने कहा कि मैनपाट संवेदनशील पहाड़ी, वन एवं पर्यावरणीय क्षेत्र है। यहां बड़े पैमाने पर बॉक्साइट खनन का प्रभाव जलस्रोतों, जंगल, कृषि भूमि, पहाड़ी पारिस्थितिकी और स्थानीय जनजातीय समुदायों पर पड़ सकता है। ऐसे में केवल खनन की अनुमति और राजस्व तक सीमित रहने के बजाय पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभावों की भी निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में प्रस्तावित खदानों को लेकर विभिन्न जनसुनवाइयों में ग्रामीणों का विरोध सामने आया है। ऐसे में प्रशासन को ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
प्रशासन से 9 बिंदुओं पर जांच की मांग
राजेश गुप्ता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
1. बरिमा खदान की लीज अवधि और वर्तमान वैधानिक स्थिति की जांच की जाए।
2. 26 दिसंबर 2025 के कथित सहमति पत्र का प्रत्येक हस्ताक्षरकर्ता से सत्यापन कराया जाए।
3. मृत व्यक्तियों एवं गांव से बाहर रहने वाले लोगों के कथित हस्ताक्षरों की जांच हो।
4. संबंधित खसरा नंबरों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए।
5. लीज समाप्ति के बाद हुए कथित खनन एवं परिवहन की जांच की जाए।
6. निकाले गए बॉक्साइट की मात्रा, रॉयल्टी एवं बिक्री का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
7. प्रभावित भू-स्वामियों को दिए गए अथवा लंबित मुआवजे की जांच की जाए।
8. खनन से प्रभावित भूमि को नियमानुसार मूल स्वरूप में लाने की कार्रवाई की जाए।
9. पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्च स्तरीय समिति अथवा सक्षम एजेंसी से कराई जाए।
“ग्रामीणों के आरोपों के बीच प्रशासन को पारदर्शिता के साथ सामने आना चाहिए”
राजेश गुप्ता ने कहा कि यह केवल जमीन या खनन का मामला नहीं है, बल्कि जनजातीय अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और शासन के राजस्व से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि दस्तावेजी जांच में सहमति पत्रों में फर्जीवाड़ा, नियमों का उल्लंघन अथवा राजस्व को नुकसान पहुंचाने जैसी बातें प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से खनन एवं संबंधित गतिविधियां नियमों के अनुसार होने की बात कही जा रही है, लेकिन यदि दूसरी ओर ग्रामीण लगातार गंभीर आरोप लगा रहे हैं और आंदोलन की स्थिति बन रही है, तो प्रशासन को पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन, मां कुदरगढ़ी एल्युमिनियम रिफाइनरी एवं सीएमडीसी की मिलीभगत से छत्तीसगढ़ की बेशकीमती बॉक्साइट संपदा को कम कीमत पर बेचकर शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, इस मिलीभगत, कथित फर्जी सहमति पत्र अथवा राजस्व नुकसान के आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता सक्षम जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
राजेश गुप्ता ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निष्पक्ष जांच शुरू की जाए, ताकि मैनपाट की प्राकृतिक संपदा, स्थानीय जनजातीय भू-स्वामियों के अधिकार और शासन के राजस्व—तीनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
Author: Chhattisgarhiya News
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