बतौली में अवैध ईंट भट्टों की बाढ़, प्रशासन मौन – सरकार को लाखों के राजस्व का नुकसान
बतौली / सरगुजा जिले के विकासखंड बतौली अंतर्गत ग्रामीण अंचलों में लगातार अवैध रूप से ईंट भट्टों का संचालन किया जा रहा है। बालमपुर, बिशनपुर, भटकों, बोदा, सरमना एवं बिरिमकेला छत्तीसगढ़ सहित कई गांवों में नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी वैधानिक अनुमति के भट्टे धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग एवं प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, इन ईंट भट्टों में कार्यरत मजदूरों का न तो संबंधित थाना क्षेत्र में मुसाफिर नाम दर्ज कराया गया है, और न ही किसी प्रकार की प्रशासनिक सूचना दी गई है, जो कि कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर लापरवाही है।
नियमों की खुली धज्जियां
छत्तीसगढ़ राज्य शासन की गाइडलाइन के अनुसार ईंट भट्टा संचालन हेतु खनन विभाग की अनुमति, पर्यावरण स्वीकृति (SEIAA), प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति (CECB), भूमि डायवर्जन, व्यापार लाइसेंस, फैक्ट्री लाइसेंस एवं जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य है। इसके बावजूद अधिकांश भट्टे बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के संचालित पाए जा रहे हैं।
पर्यावरण और शासन दोनों को नुकसान
अवैध रूप से मिट्टी उत्खनन कर न केवल पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाई जा रही है, बल्कि शासन को रॉयल्टी, जीएसटी एवं अन्य शुल्कों के रूप में लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
जन आक्रोश बढ़ता जा रहा
स्थानीय ग्रामीणों में इस खुले अवैध कारोबार को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग ईंट भट्टा संचालकों पर कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
मांग
ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि —
सभी अवैध ईंट भट्टों की तत्काल जांच कर सील की जाए,
अवैध उत्खनन एवं संचालन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो,
दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
यदि शीघ्र कठोर कदम नहीं उठाए गए तो जन आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
Author: Chhattisgarhiya News
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