सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली में चिकित्सकीय व्यवस्था बदहाल, शासन के दावों की खुल रही पोल
बतौली/सरगुजा। छत्तीसगढ़ शासन के निर्धारित मानकों के अनुसार प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में कम से कम चार विशेषज्ञ चिकित्सकों — सर्जन, फिजिशियन (सामान्य मेडिसिन), स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं बाल रोग विशेषज्ञ — की पदस्थापना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त 21 पैरामेडिकल एवं सहायक कर्मचारियों के साथ 30 बिस्तरों की सुविधा, ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे, प्रसव कक्ष एवं प्रयोगशाला जैसी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं भी आवश्यक हैं।
परंतु सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन मानकों पर खरा उतरता नजर नहीं आ रहा है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपलब्धता के कारण क्षेत्र की हजारों ग्रामीण जनता को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान में इस केंद्र में मुख्य रूप से दो चिकित्सक पदस्थ हैं। इनमें से डॉ. अखिलेश भारत द्वारा लगभग तीन वर्षों तक अवकाश पर रहते हुए पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूर्ण की गई, जिसके पश्चात सर्जरी की डिग्री प्राप्त करने के बावजूद वे अधिकांश समय जिला मुख्यालय एवं अन्यत्र सेवाएं दे रहे हैं। जबकि जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से उन्हें वेतन एवं शासकीय सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं, वहां की जनता को उनके विशेषज्ञ ज्ञान का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना मिश्रा लंबे समय से प्रसूति अवकाश पर हैं। परिणामस्वरूप महिला मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर केवल तीन-तीन दिनों के लिए अस्थायी डॉक्टरों की तैनाती क्षेत्र की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने में पूरी तरह असफल साबित हो रही है।
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है — क्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ डॉक्टरों की जिम्मेदारी केवल औपचारिक उपस्थिति तक सीमित रह गई है ? यदि पदस्थ स्थान पर सेवा देना प्राथमिकता नहीं है तो फिर पदस्थापना स्वीकार करने का औचित्य क्या है ?और सबसे महत्वपूर्ण, क्या शासन-प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि इस बदहाल व्यवस्था से अनजान हैं या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं?
कथित “ट्रिपल इंजन” सरकार के बावजूद बतौली विकासखंड को आज तक स्थायी बीएमओ तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बड़े-बड़े दावों के बीच क्षेत्र की जनता हर बार केवल आश्वासनों के भरोसे रह जाती है और बार-बार ठगी का शिकार हो रही है।
अब क्षेत्र की जनता यह जानना चाहती है कि कुंभकरण की नींद में सोए शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि कब जागेंगे और कब बतौली में वास्तविक, स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
Author: Chhattisgarhiya News
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