स्थानांतरण नीति के बावजूद जनपद पंचायत बतौली में जमे कर्मचारी, योजनाएं बनीं भ्रष्टाचार का गढ़
सरगुजा/बतौली। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2025 की स्थानांतरण नीति को कैबिनेट से मंजूरी दी गई थी, जिसमें पारदर्शिता, दक्षता और प्रशासनिक कसावट पर विशेष जोर दिया गया। नीति के अनुसार 1 जून 2025 की स्थिति में दो वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों का परस्पर सहमति से स्थानांतरण किया जाना था, जबकि एक वर्ष से कम अवधि वाले कर्मचारियों के स्थानांतरण पर रोक का प्रावधान किया गया। हालांकि नीति लागू होने के बाद शिक्षा, पुलिस सहित कई विभागों में स्थानांतरण प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी, जिसे बाद में संवेदनशील पदों पर तैनाती जैसे कुछ नियमों में संशोधन के साथ पुनः प्रारंभ किया गया।
इसके बावजूद जनपद पंचायत बतौली में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां कई कर्मचारी वर्षों से “अंगद के पांव” की तरह एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, जिसका सीधा असर राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ता दिखाई दे रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत कराए गए निर्माण कार्यों की गति अत्यंत धीमी है, वहीं स्वच्छता हेतु खरीदे गए कचरा संग्रहण ट्राइसाइकिल व अन्य सामग्री अब कबाड़ में तब्दील होती नजर आ रही है। यह स्थिति न केवल लापरवाही बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है।
नीतियों और उपदेशों में प्रशासनिक कसावट की बात जरूर की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर नजर आ रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या स्थानीय जिला प्रशासन इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेगा या फिर कुंभकरणी नींद में सोकर भ्रष्टाचार और अधूरे निर्माण कार्यों को यूं ही अनदेखा करता रहेगा।
प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिले के कलेक्टर का भी स्थानांतरण किया गया है। अब देखना यह है कि नए कलेक्टर जनपद पंचायत बतौली में व्याप्त अव्यवस्थाओं, योजनाओं में हो रही लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों पर कितनी शीघ्रता और सख्ती से कार्रवाई कर पाते हैं।
Author: Chhattisgarhiya News
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