“एक बकवास फ़िल्म जो अच्छी लगी” – दर्शकों के दिलों में जगह बना रही है ‘एक दीवाने की दीवानियत’
मुंबई, दिनांक 29 अक्टूबर 2025।कभी-कभी कोई फ़िल्म बिना किसी कहानी, थीम, संदेश या लॉजिक के भी दिल को छू जाती है — कुछ वैसी ही अनोखी अनुभूति दर्शकों को दे रही है नई फ़िल्म ‘एक दीवाने की दीवानियत’। आलोचकों के शब्दों में — “एक बकवास फ़िल्म जो अच्छी लगी” — यह फ़िल्म अपनी अलग दीवानगी से दर्शकों को कुर्सी से बांधे रखती है।
फ़िल्म की सबसे बड़ी खूबी है इसकी सरलता और असामान्य प्रस्तुति, जिसमें दर्शक नायक और नायिका के बीच के रिश्तों की पेचीदगियों में उलझकर भी खुद को कहानी से अलग नहीं कर पाते। कभी नायक खलनायक लगता है, कभी नायिका, और कभी दोनों ही ‘वो’ लगते हैं — यही द्वंद्व दर्शकों को आख़िर तक जोड़े रखता है।
लगभग 2 घंटे 20 मिनट की यह फ़िल्म न केवल बर्दाश्त करने लायक है, बल्कि दर्शकों के लिए एक भावनात्मक यात्रा बन जाती है। फ़िल्म के गाने कर्णप्रिय हैं, खूबसूरती से फ़िल्माए गए हैं और इनमें पुराने ज़माने की शायरी और संवादों की झलक महसूस होती है। निर्देशन सधा हुआ है और कलाकारों का प्रदर्शन भी प्रशंसनीय है।
दिलचस्प बात यह है कि फ़िल्म को सेंसर बोर्ड ने प्रमाण पत्र दिया है, जबकि इसमें न गालियाँ हैं, न अश्लीलता और न ही अनावश्यक हिंसा। दर्शकों का मानना है कि यह फ़िल्म सभी उम्र के लोगों के लिए देखी जा सकती है।
‘एक दीवाने की दीवानियत’ कोई बड़ी स्टारकास्ट या भारी बजट वाली फ़िल्म नहीं है, लेकिन इसमें मौजूद भावनाओं की सच्चाई, संवादों की गहराई और संगीत की मिठास ने इसे खास बना दिया है।
“दीवानगी नहीं, दीवानियत है ये — जो दिल से उतरकर रूह में बस जाती है।”
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Author: Chhattisgarhiya News
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