अंबिकापुर / सरगुजा जिले में कृषि कार्यों के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री की भारी कालाबाजारी सामने आई है। किसानों के लिए सरकारी मूल्य ₹266 में उपलब्ध होने वाला यूरिया खुले बाजार में ₹400-₹500 तक बेचा जा रहा है। इस स्थिति से किसानों को आर्थिक रूप से लूटा जा रहा है, और उनकी समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है।
कृषि कार्यों में तेजी आने के साथ ही खाद की मांग में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सहकारी समितियों में उपलब्धता नहीं होने के कारण किसान मजबूरन महंगे दामों पर खाद खरीदने को विवश हैं। किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग इस कालाबाजारी में निष्क्रिय बना हुआ है और लंबे समय से एक ही कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों के संरक्षण में यह गोरखधंधा फल-फूल रहा है।
पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री ने भी इस मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा है कि कालाबाजारी के लिए संबंधित विभाग जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग द्वारा बरसों से पदस्थ कर्मचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
मांग और सुझाव:
1. संपूर्ण जांच और कार्रवाई: प्रशासन को तत्काल इस कालाबाजारी की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
2. पदस्थापना में बदलाव: लंबे समय से एक ही कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाना चाहिए।
3. सहकारी समितियों की निगरानी: समितियों में खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए।
4. किसानों को राहत: किसानों के लिए खाद सरकारी दरों पर उपलब्ध कराई जाए।
सरगुजा के किसान प्रशासन से यह अपेक्षा करते हैं कि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा और कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस कालाबाजारी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे
Author: Chhattisgarhiya News
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