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विशाल बोधि महावृक्ष बना हजारों पक्षियों का आशियाना

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विशाल बोधि महावृक्ष बना हजारों पक्षियों का आशियाना

बिलासपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रकृति संरक्षण और जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करने वाला एक प्रेरक उदाहरण बिलासपुर के जूना बिलासपुर स्थित उदई चौक के समीप देखने को मिलता है। सुरेंद्र मार्ग से अरपा नदी की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित सदियों पुराना विशाल पीपल का महावृक्ष आज हजारों पक्षियों का सुरक्षित आश्रय बना हुआ है।

स्थानीय नागरिक एवं साहित्यकार सुरेश सिंह बैस के अनुसार यह विशाल पीपल वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि प्रकृति का जीवंत प्रतीक है। इस वृक्ष पर तोता, मैना, गौरैया, कौवा, चील, बाज, उल्लू, कबूतर, बुलबुल, फूलचुक्की, बगुला तथा चमगादड़ सहित अनेक प्रजातियों के पक्षी निवास करते हैं। अनुमानतः प्रतिदिन हजारों की संख्या में पक्षी यहां रात्रि विश्राम के लिए आते हैं।

प्रतिदिन गोधूलि बेला में चारों दिशाओं से तोतों एवं अन्य पक्षियों के झुंड अनुशासित कतारों में उड़ते हुए इस वृक्ष पर पहुंचते हैं। लगभग आधे घंटे तक चलने वाला यह दृश्य प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता। पक्षियों का सामूहिक कलरव वातावरण को जीवंत बना देता है और प्रकृति का अनुपम संगीत रचता है।

विशेष बात यह है कि आसपास अन्य बड़े वृक्ष मौजूद होने के बावजूद पक्षियों का इतना विशाल जमावड़ा केवल इसी पीपल वृक्ष पर दिखाई देता है। मानो प्रकृति ने इसे पक्षियों की राजधानी घोषित कर दिया हो। वृक्ष की घनी शाखाएं और सुरक्षित वातावरण इसे पक्षियों के लिए आदर्श आश्रय बनाते हैं।

भारतीय संस्कृति में पीपल वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। वृक्ष के समीप स्थित मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना, आरती और भजन-कीर्तन होते हैं। मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि और पक्षियों के कलरव से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुरेश सिंह बैस ने नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण एवं वृक्ष संरक्षण का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि एक वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देता, बल्कि असंख्य जीव-जंतुओं और पक्षियों को जीवन, सुरक्षा और आश्रय भी प्रदान करता है। आज जब शहरीकरण के कारण हरियाली लगातार कम हो रही है, तब ऐसे वृक्षों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कुछ वृक्ष लगाने और उन्हें संरक्षित करने का संकल्प ले, तो पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

जड़ों में जिसके मंदिर, शाखों पर संसद सारी,

पत्तों की सरसराहट में बसी ममता की क्यारी।

उजड़ती दुनिया में जो अब भी देता है सहारा,

वो पीपल नहीं, धरती का उज्ज्वल है उजियारा।

Chhattisgarhiya News
Author: Chhattisgarhiya News

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