मैनपाट में प्रस्तावित नई बाक्साइट खदानों का जोरदार विरोध, ग्रामीण बोले– “न पक्ष, न विपक्ष, मैनपाट बचाने की लड़ाई”
मैनपाट/अंबिकापुर, 1 जुलाई। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल एवं “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहलाने वाले मैनपाट में प्रस्तावित नई बाक्साइट खदानों के विरोध में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना का पुरजोर विरोध किया। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि मैनपाट के अस्तित्व, पर्यावरण और भविष्य को बचाने का आंदोलन है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायतों को प्रस्तावित खदानों की स्वीकृति संबंधी कोई जानकारी नहीं दी गई। माइनिंग प्लान में बौद्ध मंदिर, प्रमुख पर्यटन स्थल, आरक्षित वन क्षेत्र तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की जानकारी छिपाकर स्वीकृति लेने का प्रयास किया गया है। उनका कहना था कि यदि सभी तथ्य सामने रखे जाते तो स्थानीय स्तर पर पहले ही इसका विरोध होता।
ग्रामीणों ने कहा कि मैनपाट में प्रतिदिन हजारों पर्यटक आते हैं, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर्यटन पर निर्भर है। यदि नई बाक्साइट खदानें शुरू होती हैं तो पर्यावरण, जलस्रोत, वन संपदा और पर्यटन उद्योग पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका भी संकट में पड़ जाएगी।
विरोध कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले से संचालित बाक्साइट खदानों में नियमों की अनदेखी कर खनन किया जा रहा है। स्थानीय मजदूरों का शोषण हो रहा है, जबकि क्षेत्र की जनता को रोजगार और विकास का लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए मैनपाट की प्राकृतिक संपदा का लगातार दोहन किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि “न पक्ष, न विपक्ष, पूरा मैनपाट एकजुट होकर इस परियोजना का विरोध कर रहा है। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन दोनों ही सरकारों ने मैनपाट की जनता के साथ छल किया है। यहां की छाती चीरकर बाक्साइट निकाला जाता है, उद्योगपतियों के घर भरते हैं, जबकि स्थानीय लोगों को गड्ढे, धूल, प्रदूषण और बदहाल सड़कें ही मिलती हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यटन विकास के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं। आज भी मैनपाट की अधिकांश सड़कें जर्जर हैं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। सरकारों ने पर्यटन क्षेत्र के विकास और स्थानीय लोगों के हितों की लगातार उपेक्षा की है।
जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रस्तावित खदानों के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ लोगों ने परियोजना के समर्थन में भी अपनी बात रखी, लेकिन भारी विरोध और हंगामे के बीच प्रशासन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी कराई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर नई बाक्साइट खदानों को शुरू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से आंदोलन जारी रखने का संकल्प लेते हुए कहा कि यदि सरकार जनता की भावनाओं की अनदेखी करती है, तो इसका जवाब आगामी चुनावों में दिया जाएगा। मैनपाट की प्राकृतिक धरोहर, पर्यटन पहचान और पर्यावरण की रक्षा के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
Author: Chhattisgarhiya News
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