बतौली में आयोजित आंगनवाड़ी सेमिनार पर उठे सवाल, जमीनी हकीकत और दावों में अंतर का आरोप
बतौली, 14 मई 2026। विकासखंड बतौली में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECE) विषय पर आयोजित आंगनवाड़ी शिक्षिका सेमिनार को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं। एक ओर मंच से खेल और गतिविधि आधारित शिक्षा, नवाचार एवं बच्चों के समग्र विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए, वहीं दूसरी ओर कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की।
कार्यक्रम में लगभग 150 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति बताई गई, लेकिन कई शिक्षिकाओं का कहना है कि वास्तविक समस्याओं और संसाधनों की कमी पर गंभीर चर्चा नहीं हो सकी। कुछ कार्यकर्ताओं ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कई केंद्रों में अब भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जबकि प्रस्तुतियों में आदर्श व्यवस्था का चित्र पेश किया गया।
सेमिनार में 11 शिक्षिकाओं द्वारा नवाचारों की प्रस्तुति दी गई, लेकिन अन्य कार्यकर्ताओं का कहना था कि केवल चुनिंदा उदाहरणों को सामने रखकर पूरे क्षेत्र की स्थिति बेहतर बताने का प्रयास किया गया। कई केंद्रों में बच्चों की नियमित उपस्थिति, शिक्षण सामग्री, भवन व्यवस्था और पालक सहभागिता जैसी चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों द्वारा गतिविधि आधारित शिक्षा को लेकर प्रेरक बातें कही गईं, लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि जमीनी स्तर पर आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण और सहयोग के बिना ऐसे दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
कुछ शिक्षिकाओं ने यह भी कहा कि भविष्य में इस प्रकार के आयोजनों में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को अपनी वास्तविक समस्याएँ और अनुभव साझा करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि केवल औपचारिक प्रस्तुतियों तक कार्यक्रम सीमित न रहे।
सेमिनार के समापन पर कई प्रतिभागियों ने मांग की कि आगामी आयोजनों में केवल उपलब्धियों का प्रदर्शन करने के बजाय आंगनवाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति, संसाधनों की कमी और बच्चों से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए, जिससे योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर तक पहुंच सके।
Author: Chhattisgarhiya News
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