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हाथी प्रभावित क्षेत्र कांडराजा में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान का ग्रामीणों द्वारा विरोध – प्रशासन की अनुमति और चुप्पी पर उठे सवाल

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हाथी प्रभावित क्षेत्र कांडराजा में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान का ग्रामीणों द्वारा विरोध – प्रशासन की अनुमति और चुप्पी पर उठे सवाल

 

मैनपाट, सरगुजा | 10 नवम्बर 2025 मैनपाट क्षेत्र के हाथी प्रभावित ग्राम कांडराजा में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। लगभग 137 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस माइनिंग परियोजना की जनसुनवाई 30 नवम्बर 2025 को निर्धारित की गई है, जिसके विरोध में ग्रामवासियों ने एकजुट होकर शांतिपूर्ण आंदोलन करने का निर्णय लिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि शासन एवं प्रशासन द्वारा जिस भूमि को “बंजर” घोषित किया गया है, वह वास्तव में उपजाऊ कृषि भूमि है, जहाँ वर्षों से खेती की जा रही है। वर्तमान में भी उसी भूमि पर टाऊ की फसल लहलहा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उद्योगपतियों के दबाव में आकर भूमि को बंजर घोषित कर खनन की अनुमति देने की प्रक्रिया आरंभ की है।

इसके अलावा, जिन किसानों को पूर्व में इस भूमि पर वैध पट्टा दिया गया था, उनके अधिकारों को बिना किसी उचित कारण के निरस्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई ने ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति गहरा अविश्वास उत्पन्न कर दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि कांडराजा क्षेत्र हाथी प्रभावित क्षेत्र होने के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील है। यहाँ खनन प्रारंभ होने से न केवल पर्यावरण और जलस्रोतों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा, बल्कि लोगों की आजीविका पर भी गंभीर संकट उत्पन्न होगा।

“प्रशासन की अनुमति और चुप्पी भी संदिग्ध” — ग्रामीणों ने यह आरोप लगाते हुए कहा कि जब राज्य सरकार स्वयं पर्यावरण संरक्षण और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की दिशा में अभियान चला रही है, तब मैनपाट जैसे ‘छत्तीसगढ़ के शिमला’ कहे जाने वाले क्षेत्र में ऐसी परियोजना को कैसे मंजूरी दी जा सकती है — यह अब जांच का विषय है।

ग्रामवासियों ने एकमत से कहा है कि वे जनसुनवाई के दिन बड़ी संख्या में पहुँचकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएँगे तथा शासन से यह माँग करेंगे कि –

1. प्रस्तावित बॉक्साइट खदान परियोजना को तत्काल निरस्त किया जाए।

2. जिन किसानों के पट्टे रद्द किए गए हैं, उन्हें पुनः बहाल किया जाए।

3. हाथी प्रभावित एवं पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

 

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी बातों पर ध्यान नहीं देता, तो वे जनआंदोलन को तेज करेंगे।

Chhattisgarhiya News
Author: Chhattisgarhiya News

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