बिलासपुर, 30 सितंबर 2025। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने शासकीय बृजलाल वर्मा महाविद्यालय, पलारी (जिला बलौदाबाजार-भाटापारा) में राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री कमलेश दुबे के निलंबन आदेश को रद्द करते हुए इसे अवैध व दुर्भावनापूर्ण घोषित किया है।
न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि श्री दुबे के विरुद्ध जारी निलंबन आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है तथा यह कार्यवाही दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है।
क्या था मामला : श्री कमलेश दुबे को 23 सितंबर 2015 को निलंबित किया गया था। निलंबन आदेश न तो उचित नोटिस पर आधारित था और न ही याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया।
आदेश मुख्यतः कुछ शिकायतों एवं समाचार पत्र में प्रकाशित खबरों के आधार पर पारित किया गया था।
न्यायालय की टिप्पणी / न्यायालय ने कहा कि— केवल शिकायतों या समाचार पत्र की खबरों के आधार पर किसी कर्मचारी को निलंबित करना न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के विपरीत है।
इस प्रकार की कार्यवाही से याचिकाकर्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर आघात पहुँचा। सेवा नियमों के अंतर्गत निष्पक्ष सुनवाई व उचित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।श्री कमलेश दुबे का सेवा रिकॉर्ड श्री दुबे ने महाविद्यालय में लगभग 23 वर्षों तक निष्कलंक सेवा प्रदान की है।न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि श्री दुबे पूर्व में ही सेवा में पुनः बहाल किए जा चुके हैं।
निर्णय का महत्व यह फैसला न केवल श्री दुबे के व्यक्तिगत सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा करता है बल्कि राज्य के सभी शासकीय कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में न्याय और पारदर्शिता की स्थापना में मील का पत्थर साबित होगा।
Author: Chhattisgarhiya News
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