मुंबई – “प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती।” इस कथन को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली गाँव से निकले विराट गुप्ता ने भारतीय फिल्म और साहित्य जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
साहित्य और सिनेमा से गहरा जुड़ाव
बचपन से ही सिनेमा और साहित्य में गहरी रुचि रखने वाले विराट ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव में पूरी की। चित्रकला, नृत्य और अभिनय जैसे सह-पाठयक्रम गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उनके भीतर की रचनात्मकता को निखारा। उच्च शिक्षा के लिए चेन्नई जाने पर उन्होंने एनीमेशन, वीएफएक्स और गेम डिज़ाइन में डिप्लोमा प्राप्त किया।
कदम दर कदम सफलता की ओर
चेन्नई में रहते हुए, विराट ने हिंदी में तमिल फिल्मों के लिए डबिंग आर्टिस्ट के रूप में काम किया और कॉल सेंटर में अंशकालिक नौकरी कर अपने सपनों की राह बनाई। इसके बाद, उन्होंने एनीमेशन और वीएफएक्स में फैकल्टी के रूप में प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया। फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में शुरुआत कर उन्होंने मुंबई का रुख किया।
फिल्मी दुनिया में पहचान
मुंबई में विराट ने पटकथा सलाहकार, लेखक, गीतकार, निर्देशक और पोस्ट-प्रोडक्शन विशेषज्ञ के रूप में काम किया। रमेश सिप्पी प्रोडक्शन, विक्रम भट्ट प्रोडक्शन, बीबीसी मीडिया, बावेजा मूवीज़ और सारेगामा यूडली फिल्म्स जैसी कंपनियों के साथ उनका जुड़ाव उनकी बहुमुखी प्रतिभा का परिचायक है।
साहित्यिक योगदान
विराट ने अब तक दो किताबें लिखी हैं, जो उनकी कविताओं का संग्रह हैं। इसके अलावा, उन्होंने कई गाने, संवाद और पटकथाएँ भी लिखी हैं, जो उनकी साहित्यिक क्षमता का प्रमाण हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
विराट का कहना है, “मैं ऐसी कहानियां बताना चाहता हूँ, जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालें। मेरा सपना है कि लोग मेरी रचनाओं को याद करें और उनसे प्रेरणा लें।”
समर्पण और मेहनत की प्रेरणादायक कहानी
विराट गुप्ता की यह यात्रा हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और समर्पण से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
Author: Chhattisgarhiya News
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