विनाश की शर्त पर विकास मंजूर नहीं: पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत
मैनपाट/अंबिकापुर। मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित नई बॉक्साइट खदानों के विरोध में आयोजित जनसुनवाई के दौरान पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि “विनाश की शर्त पर विकास हमें मंजूर नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि खनन गतिविधियों से क्षेत्र का पर्यावरण, जल स्रोत और लोगों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ जाएगा।
अमरजीत भगत ने कहा कि आज क्षेत्र के लोग अपनी जमीन बेचकर इलाज कराने को मजबूर हैं, लेकिन खनन कंपनियां न तो इलाज में मदद कर रही हैं, न शिक्षा के क्षेत्र में कोई योगदान दे रही हैं और न ही पेयजल की व्यवस्था के लिए कोई ठोस पहल कर रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कंपनियां स्थानीय लोगों के बुनियादी जीवन स्तर को बेहतर बनाने में योगदान नहीं दे रही हैं, तो उन्हें क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मैनपाट के समीप स्थित घुनघुटा नदी का उद्गम स्थल भी प्रस्तावित खनन से प्रभावित होने की आशंका है। यही जल स्रोत आसपास की सिंचाई व्यवस्था के साथ-साथ अंबिकापुर शहर के लोगों की प्यास भी बुझाता है। यदि अंधाधुंध खनन जारी रहा तो भविष्य में अंबिकापुर के विस्तार और पेयजल संकट जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि एक ओर लाखों पेड़ों की कटाई की जा रही है और दूसरी ओर केवल “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का दावा किया जा रहा है। उन्होंने इसे विरोधाभासी बताते हुए कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अमरजीत भगत ने इस बात पर भी प्रसन्नता व्यक्त की कि इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर सभी एकजुट दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधि एक मंच पर आकर मैनपाट की जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि रजनीश सिंह और श्रीराम सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों का विरोध में शामिल होना इस जनआंदोलन को और अधिक मजबूत बनाता है।
उन्होंने अंत में कहा कि मैनपाट की प्राकृतिक धरोहर, पर्यटन, जल स्रोत और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा तथा जनभावनाओं की अनदेखी कर किसी भी कीमत पर खनन परियोजनाओं को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
Author: Chhattisgarhiya News
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