विद्यालयों के आसपास आवारा कुत्तों को हटाने के निर्णय का स्वागत, पत्रकार सुरक्षा पर भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कठोर पालन की मांगआईंरा इंटरनेशनल रिपोर्टर एसोसिएशन,
(रायपुर छत्तीसगढ़) प्रदेश सरकार द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा–निर्देशों का पालन करते हुए विद्यालयों के परिसर एवं आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों को हटाने के लिए संकुल समन्वयकों तथा प्राचार्यों को जिम्मेदारी सौंपने के निर्णय का स्वागत करती है। संगठन का मत है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस संदर्भ में शिक्षा विभाग द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय एवं समयोचित है। इसी संदर्भ में आईंरा इंटरनेशनल रिपोर्टर एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत वर्मा ने एक गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट समय–समय पर पत्रकारों की सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता, फर्जी एफआईआर पर रोक तथा मीडिया के अधिकारों को लेकर स्पष्ट दिशा–निर्देश जारी करता रहा है। इन निर्देशों की भावना यह है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में काम कर रहे पत्रकारों को निर्भय वातावरण मिले, ताकि वे जनहित, भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और सार्वजनिक मुद्दों को निष्पक्ष रूप से उजागर कर सकें। श्री वर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार पत्रकारों पर दर्ज की जाने वाली फर्जी या प्रताड़नापूर्ण एफआईआर की जिम्मेदारी संबंधित राज्य के पुलिस महानिदेशक पर निर्धारित की गई है, और केवल स्रोत–आधारित खबरें चलाने या सरकार की आलोचना करने भर से किसी पत्रकार पर मानहानि अथवा दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके बावजूद विभिन्न राज्यों में पत्रकारों पर फर्जी प्रकरण दर्ज करने, अनावश्यक दबाव बनाने तथा उनकी सुरक्षा की अनदेखी करने जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। आईंरा इंटरनेशनल रिपोर्टर एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ की मांगेंप्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत वर्मा ने कहा कि जैसे विद्यालयों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों संबंधी निर्देशों का तत्काल और कठोर अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है, उसी प्रकार पत्रकारों की सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और फर्जी एफआईआर पर रोक से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर भी बिना किसी विलंब के कड़ाई से अमल कराया जाए। संगठन की प्रमुख मांगें निम्नानुसार हैं:फर्जी एफआईआर दर्ज करने अथवा दबावपूर्वक प्रकरण बनाने में लिप्त पाए जाने वाले संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त से सख्त विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि ऐसी प्रवृत्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक लग सके। पत्रकारों एवं मीडियाकर्मियों के हितों की सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर स्पष्ट, बाध्यकारी और समयबद्ध एडवाइजरी जारी की जाए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के प्रासंगिक निर्णयों, छत्तीसगढ़ मीडियाकर्मी सुरक्षा कानून जैसे प्रावधानों और पत्रकारों पर कार्रवाई की स्थिति में अनुपालन की अनिवार्य प्रक्रिया को विस्तार से उल्लेखित किया जाए। जिला स्तर पर संयुक्त समिति/मॉनिटरिंग मैकेनिज्म स्थापित किया जाए, जो पत्रकार सुरक्षा, फर्जी मामलों की समीक्षा और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े शिकायतों की निगरानी एवं त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करे। आईंरा छत्तीसगढ़ का स्पष्ट मत है कि लोकतंत्र तभी वास्तविक रूप से मजबूत रह सकता है, जब पत्रकार सुरक्षित, निर्भय और स्वतंत्र होकर कार्य कर सकें और उन्हें कानून तथा शासन व्यवस्था की ओर से व्यावहारिक संरक्षण प्राप्त हो। संगठन ने प्रदेश सरकार और संबंधित सभी संवैधानिक संस्थाओं से अपेक्षा की है कि वे पत्रकार सुरक्षा संबंधी संवैधानिक मूल्यों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का कठोरता से पालन कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
Author: Chhattisgarhiya News
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