बांसा झाल के ग्रामीणों की मांग शासकीय भूमि पर पेड़ लगाने के नाम पर कब्जे की कोशिश पर रोक लगाई जाए
सरगुजा, बतौली | 05 नवम्बर 2025 ग्राम बांसाझाल (रा.नि.सं. बोदा, तहसील बतौली) की शासकीय भूमि पर “वनीकरण” के नाम पर कब्जा करने की कोशिश का खुलासा होने के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। माँ कुदरगढ़ी स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने लगभग 90.086 हेक्टेयर भूमि को “प्रतिस्थापन वनीकरण” हेतु उपयोग करने की अनुमति के लिए आवेदन दिया है, जो कि पूर्णतः शासकीय भूमि है।
प्राप्त दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ है कि कंपनी ने न्यायालय नायब तहसीलदार, बतौली को आवेदन प्रस्तुत कर खसरा नंबर 73/1, 73/4, 333/1, 340/1, 459 एवं 1510/1 की भूमि को वनीकरण हेतु उपयोग करने की अनुमति मांगी है। यह भूमि ग्राम पंचायत बांसाझाल की सार्वजनिक भूमि है, जिस पर वर्षों से विशेष संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरबा, दी कोरबा तथा अन्य अनुसूचित जनजाति समुदाय अपनी आजीविका के लिए आश्रित हैं।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण के नाम पर यह पूरी योजना उद्योगपतियों द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा जमाने की साजिश है। मैनपाट क्षेत्र के सपनादर बॉक्साइट ब्लॉक में खनन की अनुमति प्राप्त करने के बाद अब कंपनी प्रतिस्थापन वनीकरण के नाम पर बतौली क्षेत्र की सरकारी भूमि पर कब्जा करना चाहती है, जो कानून और पर्यावरणीय संतुलन दोनों के विपरीत है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि — “यदि खनन मैनपाट क्षेत्र में किया जा रहा है, तो पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति हेतु वनीकरण भी वहीं किया जाना चाहिए। बतौली क्षेत्र की भूमि पर वृक्षारोपण के नाम पर कब्जा उद्योगपतियों की भूमि हड़पने की नीति का हिस्सा है।”
ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (रा.), सीतापुर से मांग की है कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवेदन को तत्काल निरस्त करें। साथ ही संबंधित विभागों को निर्देश दें कि शासकीय भूमि को औद्योगिक उपयोग हेतु किसी भी रूप में आवंटित न किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं दी गई और जब समाजसेवियों द्वारा दस्तावेज प्राप्त हुए, तब जाकर पूरे प्रकरण का खुलासा हुआ। अब ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठन इस मामले में एकजुट होकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
माँ कुदरगढ़ी स्टील्स प्रा. लि. का वनीकरण अनुमति हेतु प्रस्तुत आवेदन तत्काल निरस्त किया जाए।
ग्राम बांसाझाल की शासकीय भूमि को “सामुदायिक उपयोग हेतु संरक्षित” घोषित किया जाए।
संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाए।
जनजातीय समुदायों की आजीविका प्रभावित न हो, इसके लिए भूमि पर किसी भी औद्योगिक गतिविधि पर रोक लगाई जाए।
यह मामला वर्तमान में न्यायालय नायब तहसीलदार, बतौली के संज्ञान में है, जिन्होंने विभागों को 28 अक्टूबर 2025 तक विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उचित कार्रवाई नहीं की, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
Author: Chhattisgarhiya News
सच्ची बात सिर्फ छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के साथ








