शबरी एम्पोरियम मैनपाट: शासन की महत्वाकांक्षी योजना उपेक्षा और अव्यवस्था की शिकार
मैनपाट, सरगुजा। छत्तीसगढ़ शासन के उपक्रम छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा राज्य की पारंपरिक और जनजातीय शिल्पकला को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से स्थापित शबरी एम्पोरियम आज उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार होता दिख रहा है। राज्य के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट स्थित शबरी एम्पोरियम, जो स्थानीय आदिवासी शिल्पकारों के हस्तनिर्मित उत्पादों के प्रचार-प्रसार और विक्रय का प्रमुख केंद्र था, आज अपने ही अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
शबरी एम्पोरियम योजना का उद्देश्य राज्य की प्राचीन और लुप्त होती शिल्पकला को पुनर्जीवित करना, कारीगरों को प्रशिक्षण देना और उनके उत्पादों के विपणन के लिए मंच उपलब्ध कराना था। इस योजना के तहत बेल मेटल, लौह शिल्प, लकड़ी के उत्पाद, टेराकोटा, जूट और अन्य पारंपरिक वस्तुओं का उत्पादन और विक्रय किया जाना था।
लेकिन वर्तमान में मैनपाट स्थित शबरी एम्पोरियम का भवन महीनों से बंद पड़ा हुआ है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, न तो यहां किसी प्रकार की शिल्प सामग्री उपलब्ध है और न ही शिल्पकारों के उत्पादों का वितरण या बिक्री हो रही है। इससे यह स्पष्ट है कि जिस उद्देश्य के लिए यह योजना शुरू की गई थी — शिल्पकारों की आजीविका बढ़ाने और पारंपरिक कला को संरक्षित करने का — वह पूरी तरह विफल होता दिखाई दे रहा है।
शिल्पकारों का कहना है कि शासन की उदासीनता और विभागीय लापरवाही के कारण यह एम्पोरियम अब केवल नाममात्र का रह गया है। जहां कभी स्थानीय कला का जीवंत प्रदर्शन होता था, वहां आज ताले जड़े हैं।
मांग: जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने शासन से मांग की है कि शबरी एम्पोरियम की वर्तमान स्थिति की जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए, तथा इस योजना को उसके मूल उद्देश्य — शिल्पकारों के सशक्तिकरण और पारंपरिक कला के संरक्षण — की दिशा में पुनर्जीवित किया जाए।
Author: Chhattisgarhiya News
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