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E20 के नाम पर जल, खाद्य सुरक्षा और आम जनता की जेब से समझौता कर रही मोदी सरकार: परवेज़ आलम गांधी

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E20 के नाम पर जल, खाद्य सुरक्षा और आम जनता की जेब से समझौता कर रही मोदी सरकार: परवेज़ आलम गांधी

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने केंद्र सरकार की E20 फ्यूल नीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार E20 को स्वच्छ ऊर्जा और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन इसके पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों का आकलन जल संसाधनों, खाद्य सुरक्षा और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

परवेज़ गांधी ने कहा कि सरकार की ओर से एथेनॉल मिश्रण के माध्यम से ईंधन की कीमतों में राहत देने के दावे किए गए थे, लेकिन आम जनता को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। इसके विपरीत, E20 ईंधन के कारण वाहनों के माइलेज में कमी की शिकायतों के बीच उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की बात सामने आई है।

उन्होंने कहा कि यदि E20 नीति वास्तव में आम जनता के हित में है तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि माइलेज में कमी की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं को किस प्रकार की राहत दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि E20 नीति का वास्तविक आर्थिक लाभ आम वाहन मालिकों को मिल रहा है या एथेनॉल उद्योग को?

जल संकट पर भी उठाए सवाल

परवेज़ गांधी ने कहा कि भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, धान और मक्का जैसी फसलों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में देश के कई हिस्सों में बढ़ते भूजल संकट के बीच खाद्यान्न आधारित एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध आकलनों में फसल के आधार पर एथेनॉल उत्पादन के लिए पानी की काफी अधिक आवश्यकता बताई गई है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बड़े पैमाने पर खाद्यान्न आधारित एथेनॉल उत्पादन का जल सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा।

उन्होंने कहा कि जब कृषि अवशेष और अन्य जैविक अपशिष्ट से एथेनॉल उत्पादन जैसे वैकल्पिक और अपेक्षाकृत टिकाऊ विकल्प मौजूद हैं, तो सरकार को खाद्यान्न आधारित एथेनॉल पर अपनी नीति की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि वास्तविक ग्रीन फ्यूल नीति वही होगी, जिसमें ईंधन उत्पादन से लेकर उसके उपयोग तक के पूरे पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभाव का निष्पक्ष आकलन हो। जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा, किसानों के हित और आम उपभोक्ताओं की आर्थिक क्षमता की कीमत पर किसी भी ईंधन नीति को जनहितैषी नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने केंद्र सरकार से E20 नीति के आर्थिक, पर्यावरणीय और जल संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभावों का स्वतंत्र एवं पारदर्शी अध्ययन सार्वजनिक करने की मांग की है।

Chhattisgarhiya News
Author: Chhattisgarhiya News

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