देश का भविष्य बुलडोज़र से नहीं, किताबों और विश्वविद्यालयों से बनता है – परवेज़ आलम गांधी
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसके स्वतंत्र, सशक्त और स्वायत्त शिक्षा संस्थानों से होती है। विश्वविद्यालय केवल डिग्रियाँ प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे विचार, विवेक, वैज्ञानिक सोच, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक चेतना के केंद्र होते हैं। उन्होंने कहा कि जो सत्ता विश्वविद्यालयों को बुलडोज़र, प्रशासनिक दमन या राजनीतिक प्रतिशोध का निशाना बनाती है, वह केवल इमारतों को नहीं, बल्कि देश के भविष्य, ज्ञान और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी क्षति पहुँचाती है।
परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े घटनाक्रम ने देशभर में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और उनके भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के संबंध में होने वाली कार्रवाई कानून के दायरे में, पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए। यदि शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक विवादों का केंद्र बनाया जाएगा, तो इसका दुष्प्रभाव पूरे शैक्षणिक वातावरण पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल युवाओं को रोजगार के योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करना भी है। लोकतंत्र को मजबूत करने वाले विचार, सामाजिक न्याय की आवाज़ और संविधान के मूल्यों का प्रसार विश्वविद्यालयों से ही होता है। यही कारण है कि लोकतांत्रिक देशों में शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्रता और गरिमा को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है।
परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि आज देश को ऐसे माहौल की आवश्यकता है, जहाँ शिक्षा, शोध, नवाचार और स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहन मिले। पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ और विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। यदि शिक्षा के केंद्र भय, असुरक्षा या राजनीतिक दबाव में काम करेंगे, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान देश के करोड़ों युवाओं और भारत के भविष्य को होगा।
उन्होंने कहा कि सरकारों का दायित्व शिक्षा संस्थानों को मजबूत करना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार करना है, न कि उन्हें राजनीतिक टकराव का माध्यम बनाना। लोकतंत्र में असहमति का सम्मान, शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और कानून का निष्पक्ष पालन ही राष्ट्र को मजबूत बनाता है। भारत का भविष्य बुलडोज़र से नहीं, बल्कि किताबों, शोध, ज्ञान और विश्वविद्यालयों से निर्मित होगा। शिक्षा को सुरक्षित रखना लोकतंत्र और संविधान की आत्मा की रक्षा करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
Author: Chhattisgarhiya News
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