मैनपाट में मानवता शर्मसार : 90 वर्षीय बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर पेंशन लेने पहुंची बहू, साय सरकार के ‘सुशासन’ की खुली पोल
अंबिकापुर/मैनपाट, 23 मई 2026। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट से सामने आई एक बेहद मार्मिक और शर्मनाक तस्वीर ने शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार एक ओर ‘डिजिटल इंडिया’, ‘सुशासन’ और ‘घर-घर सेवा’ जैसे बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों को अपनी छोटी-सी पेंशन के लिए अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
मैनपाट विकासखंड के ग्राम कुनिया जंगलपारा निवासी सुखमनिया बाई पिछले कई महीनों से अपनी लगभग 90 वर्षीय बुजुर्ग और असहाय सास को पीठ पर लादकर पेंशन निकालने बैंक ले जाने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि पेंशन की राशि प्राप्त करने के लिए बुजुर्ग महिला की बैंक में शारीरिक उपस्थिति आवश्यक बताई जाती है, जिसके कारण यह परिवार भारी परेशानियों से गुजर रहा है।
भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बीच सुखमनिया बाई अपनी वृद्ध सास को पीठ पर बैठाकर पथरीले और दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए लगभग 5 किलोमीटर दूर नर्मदापुर स्थित सेंट्रल बैंक तक पहुंचती हैं। रास्ते में नाले, ऊबड़-खाबड़ पगडंडियां और जंगल का इलाका पार करना पड़ता है। यह दृश्य न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए मूलभूत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति भी सामने लाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की योजनाएं केवल कागजों और विज्ञापनों तक सीमित होकर रह गई हैं। यदि वास्तव में घर-पहुंच सेवा और डिजिटल व्यवस्था प्रभावी होती, तो एक बुजुर्ग महिला को इस उम्र में इस तरह अपमानजनक और कष्टदायक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि बुजुर्गों और असहाय लोगों के लिए घर पहुंच पेंशन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
Author: Chhattisgarhiya News
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