सरगुजा में लैप्रोस्कोपिक नसबंदी योजना की रफ्तार धीमी लक्ष्य पूर्ति पर सवाल, दायरा और निगरानी को लेकर उठे मुद्दे
अम्बिकापुर | सरगुजा जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित महिला परिवार नियोजन कार्यक्रम, विशेषकर दूरबीन पद्धति (Laparoscopic) से नसबंदी, की प्रगति अपेक्षित लक्ष्य के अनुरूप नहीं दिखाई दे रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति अब तक धीमी गति से हो रही है, जिससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले में यह सुविधा मुख्यतः अम्बिकापुर जिला अस्पताल एवं विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में उपलब्ध कराई जा रही है। दूरबीन पद्धति को कम चीरा, कम जटिलता और शीघ्र रिकवरी के कारण महिलाओं द्वारा अधिक स्वीकार किया जाता है, इसके बावजूद अपेक्षित संख्या में लाभार्थियों की भागीदारी नहीं हो पा रही है।
सूत्रों के अनुसार जनवरी 2026 की दैनिक या मासिक उपलब्धियां सार्वजनिक डोमेन में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं, जिससे पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, पूर्व वर्षों में जिले में एक ही दिन में बड़ी संख्या में नसबंदी किए जाने की घटनाओं के बाद सरकार द्वारा गुणवत्ता मानकों को सख्त किया गया था, जिसका प्रभाव अब योजना की गति पर पड़ता नजर आ रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार की नीति के तहत नसबंदी कराने वाली महिलाओं को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने का प्रावधान है, बावजूद इसके ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में जागरूकता, शिविरों की नियमितता और संसाधनों की उपलब्धता को लेकर असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
योजना के निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति कब तक होगी?
धीमी प्रगति के लिए जिम्मेदार कारण क्या हैं—प्रशासनिक लापरवाही, संसाधनों की कमी या जनजागरूकता का अभाव? क्या स्वास्थ्य विभाग द्वारा निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था पर्याप्त है? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते योजना के दायरे, क्रियान्वयन रणनीति और निगरानी तंत्र की समीक्षा नहीं की गई, तो परिवार नियोजन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।
Author: Chhattisgarhiya News
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