वैकल्पिक चिकित्सकों के भरोसे मरीजों की देखभाल, आमजन में आक्रोश
बतौली (सरगुजा)। विकासखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। ब्लॉक का एकमात्र बड़ा सरकारी चिकित्सालय होने के बावजूद यहां की सेवाएं स्थायी चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।
वर्तमान में मुख्य रूप से पदस्थ चिकित्सक डॉ. अर्चना मिश्रा लंबे समय से अवकाश पर हैं। इसके चलते शासन-प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थ चिकित्सकों को सप्ताह में कुछ दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली में कार्य करने के आदेश जारी किए गए हैं।
इसी क्रम में—
डॉ. अखिलेश कुमार भारत को सप्ताह में तीन दिन (मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार) पुरुष नसबंदी, हाइड्रोसील शल्य क्रिया एवं अन्य कार्यों हेतु,
डॉ. संतोष सिंह को सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार) चिकित्सकीय सेवाएं देने हेतु
सीएचसी बतौली में उपस्थित रहने के आदेश दिए गए हैं।
हालांकि यह व्यवस्था केवल अस्थायी समाधान मानी जा रही है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सप्ताह में गिने-चुने दिनों की यह वैकल्पिक व्यवस्था न तो पर्याप्त है और न ही भरोसेमंद। आकस्मिक स्थिति, गंभीर रोगों और नियमित उपचार के लिए मरीजों को अंबिकापुर या निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीएमओ को भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।
स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि
“ब्लॉक मुख्यालय होते हुए भी जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थायी डॉक्टरों के बिना चल रहा है, तो दूरस्थ ग्रामीण अंचलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।”
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि— कब सुधरेंगे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली के हालात?
कब मिलेगा आमजन को स्थायी, सुचारु और बेहतर स्वास्थ्य उपचार?
आम जनता ने शासन एवं प्रशासन से मांग की है कि सीएचसी बतौली में शीघ्र स्थायी चिकित्सकों की पदस्थापना की जाए, ताकि लोगों को उनके ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
Author: Chhattisgarhiya News
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