खनन परियोजनाओं में भूमि स्वामियों के अधिकारों की अनदेखी, रॉयल्टी/लाभांश व्यवस्था पर शासन-प्रशासन का ध्यान आवश्यक
अंबिकापुर। खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्रों में खनन परियोजनाओं के नाम पर भूमि अधिग्रहण और खनन की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है, लेकिन इसके वास्तविक लाभ से भूमि स्वामी आज भी वंचित हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अनेक अवसरों पर यह स्पष्ट किया है कि “जमीन जिसकी, खनिज उसका” — अर्थात जमीन के नीचे मौजूद खनिज भी भूमि स्वामी की संपत्ति माने जाते हैं।
कानून के अनुसार खनन का अधिकार अलग विषय है और इसके लिए खान एवं खनिज (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 1957 के तहत लाइसेंस या पट्टा आवश्यक होता है। इसी अधिनियम की धारा 9 में रॉयल्टी का प्रावधान है, जिसे खनिज के स्वामी को उसकी संपत्ति के उपयोग के बदले दिया जाने वाला वैधानिक भुगतान माना गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी रॉयल्टी को खनिज स्वामी को दिए जाने वाले भुगतान के रूप में परिभाषित किया है।
इसके बावजूद व्यवहार में देखा जा रहा है कि जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि अधिग्रहण और खनन की शुरुआत तो हो जाती है, लेकिन उद्योगपतियों द्वारा भूमि स्वामियों को न तो रॉयल्टी का उचित हिस्सा दिया जाता है और न ही खनन से होने वाले वास्तविक लाभ में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। परिणामस्वरूप, स्थानीय ग्रामीण और भूमि स्वामी केवल मुआवजे तक सीमित रह जाते हैं, जबकि वर्षों तक चलने वाले खनन से होने वाला बड़ा आर्थिक लाभ कंपनियों और अन्य हितधारकों तक सिमट कर रह जाता है।
जनता का मानना है कि यदि भूमि स्वामी की जमीन से खनिज निकाला जा रहा है, तो उसे केवल एकमुश्त मुआवजा नहीं, बल्कि रॉयल्टी का हिस्सा या लाभांश (प्रॉफिट शेयरिंग) मिलना चाहिए। यह न केवल कानूनी तर्कों पर आधारित है, बल्कि सामाजिक न्याय और स्थानीय विकास के दृष्टिकोण से भी आवश्यक है।
इस संदर्भ में शासन और प्रशासन से मांग की जाती है कि:
खनन परियोजनाओं में भूमि स्वामियों के लिए रॉयल्टी या लाभांश देने की स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए।
लीज/पट्टे और खनन अनुबंधों में भूमि स्वामियों के हितों की अनिवार्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
जनसुनवाई को केवल औपचारिक प्रक्रिया न बनाकर, उसमें उठाई गई आपत्तियों और मांगों को वास्तविक रूप से लागू किया जाए।
जनता इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है और उम्मीद करती है कि शासन-प्रशासन भूमि स्वामियों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करते हुए खनन से होने वाले लाभ में उनकी वास्तविक हिस्सेदारी सुनिश्चित करेगा।
Author: Chhattisgarhiya News
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