रामगढ़ पर्वत संरक्षण को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय का हस्तक्षेप, पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव की पहल को मिली बड़ी सफलता
अंबिकापुर / प्रभु श्रीराम और माता सीता के वनवास काल से जुड़ी पौराणिक एवं सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पर्वत के संरक्षण के प्रयासों को नवरात्रि के अवसर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव द्वारा 30 अगस्त 2025 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सहित राज्य और केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र पर सकारात्मक कार्रवाई करते हुए मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के वन विभाग के सचिव को पत्र प्रेषित कर निष्पक्ष जांच एवं न्यायोचित कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सिंहदेव ने अपने पत्र में रामगढ़ पर्वत के धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व का उल्लेख करते हुए 2019 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और ICRFI देहरादून द्वारा कराए गए जैव विविधता मूल्यांकन की रिपोर्ट का हवाला दिया था। उल्लेखनीय है कि 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए खदान संचालन पर रोक लगाई थी। 2021 की रिपोर्ट में परसा ईस्ट केंते बसेन खदान नम्बर 14 के अतिरिक्त क्षेत्र को नो-गो एरिया घोषित किया गया था। इसके बावजूद प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने 2023 में नयी खदान (केंते एक्सटेंशन खदान नम्बर 12) हेतु जनसुनवाई करवाई थी, जिसमें 1500 आपत्तियां दर्ज हुई थीं।
श्री सिंहदेव ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मौजूदा खदानों की ब्लास्टिंग से पर्वत पर दरारें पड़ी हैं और स्थानीय निवासियों व भूवैज्ञानिकों ने इसे गंभीर खतरे की चेतावनी दी है। यह क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व प्रोजेक्ट अंतर्गत आता है, जो मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2000 से 2023 के बीच इस संघर्ष में 737 लोगों की जान जा चुकी है।
इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से इस क्षेत्र में नई खदानों को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था, जिसमें भाजपा विधायकों ने भी समर्थन किया था।
वन महानिदेशक को धन्यवाद
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन महानिदेशक द्वारा जांच और न्यायोचित कार्यवाही हेतु पत्र जारी किए जाने पर पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सिंहदेव ने आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा—
“मुझे अब विश्वास है कि माता सीता और प्रभु श्रीराम से जुड़ी इस पौराणिक एवं पर्यावरणीय धरोहर के संरक्षण हेतु छत्तीसगढ़ सरकार भी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विषय विशेषज्ञों से जांच करवाकर न्यायोचित कार्यवाही करेगी।”
यह उपलब्धि रामगढ़ पर्वत के संरक्षण के आंदोलन में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे स्थानीय निवासियों, पर्यावरणविदों और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षकों मेंनई उम्मीद जगी है।
Author: Chhattisgarhiya News
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