स्वदेशी के मंत्र से आत्मनिर्भर होगा भारत
नई दिल्ली / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने हालिया काशी प्रवास के दौरान “स्वदेशी” और “आत्मनिर्भर भारत” के मंत्र को केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक उत्तर के रूप में देशवासियों के सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, छोटे किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री ने अमेरिका की ओर से भारत पर डाले जा रहे अनुचित टैरिफ दबाव का उल्लेख करते हुए कहा कि 25 प्रतिशत टैरिफ न केवल अतार्किक है, बल्कि भारत की कृषि एवं डेयरी संरचना पर सीधा आघात है। उन्होंने कहा कि भारत की 55% से अधिक जनसंख्या खेती पर निर्भर है, और 86% किसान छोटे व सीमांत किसान हैं। ऐसे में अमेरिकी औद्योगिक कृषि व्यवस्था से भारत की तुलना करना उचित नहीं है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आश्वस्त किया कि किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), सब्सिडी, सीमा शुल्क सुरक्षा, स्थानीय मूल्य श्रृंखला, किसान उत्पादक संगठन, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग इकाइयों को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि महिलाएं और भूमिहीन किसान भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी हैं, और इन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सरकार की प्रतिबद्धता है।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि “भारत भोलेनाथ को पूजता है लेकिन आवश्यकता पड़ने पर कालभैरव भी बन जाता है।” भारत रक्षा, कृषि, उद्योग सहित सभी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है। गत दशक में भारत 11वीं से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अब तीसरे स्थान की ओर अग्रसर है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि अमेरिका जैसे देशों के दबाव में भारतीय बाजार खोला गया तो अमूल जैसी सहकारी संस्थाएं और महिला समूह आर्थिक संकट में पड़ जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी, पलायन और असंतोष बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में कृषि बजट पाँच गुना से अधिक बढ़ाकर 21,933 करोड़ से 1.25 लाख करोड़ किया गया है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि –
“स्वदेशी केवल तत्कालीन आवश्यकता नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का उद्घोष है। यही मंत्र ब्रिटिश गुलामी में विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर आया, यही मंत्र परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध झेलते हुए अटल जी के काल में भारत को मजबूती देने वाला बना। आज फिर यही स्वदेशी का मंत्र भारत को अजेय शक्ति बनाने का आधार बनेगा।”
उन्होंने सभी दलों, प्रबुद्ध नागरिकों और समाज से आह्वान किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर स्वदेशी के मंत्र को अपनाएं और बढ़ावा दें। यही आत्मनिर्भर भारत और तीसरी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने की राह है।
Author: Chhattisgarhiya News
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