शिक्षा सिस्टम के तिरपाल के नीचे, भविष्य संकट में — जर्जर भवन में संचालित हो रहा है शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक
बतौली / विकासखंड बतौली के शांति पारा स्थित शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार हो चुका है। वर्ष 1966 में स्थापित यह विद्यालय कभी क्षेत्र के शिक्षा केंद्र के रूप में जाना जाता था, जहां से अनेक छात्र देश के कोनों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा चुके हैं। लेकिन आज यह विद्यालय अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है।
विद्यालय की भवन स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। छत की हालत इतनी खराब है कि उसे ढकने के लिए तिरपाल लगाया गया है, जिसके नीचे बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। तिरपाल के नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र आखिर किस सुरक्षित भविष्य की कल्पना करें?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में विद्यालय के जीर्णोद्धार हेतु 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, परंतु वह कार्य केवल कागजों तक सीमित रहा और धरातल पर उसका कोई असर नहीं दिखता।
यह अत्यंत चिंताजनक है कि जब एक ओर राज्य सरकार पीएम-श्री और आत्मानंद जैसे मॉडल स्कूलों को बेहतर भवन और आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित कर रही है, वहीं वर्षों पुराने हिंदी माध्यम के विद्यालय बदहाल स्थिति में उपेक्षित पड़े हैं।
यह विद्यालय न केवल शैक्षणिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। यदि समय रहते प्रशासन और जनप्रतिनिधि सचेत नहीं हुए तो यह विद्यालय इतिहास बन जाएगा।
प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपील है कि वे इस संवेदनशील विषय पर त्वरित संज्ञान लें, विद्यालय के पुनर्निर्माण एवं आवश्यक मरम्मत कार्य के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल प्राप्त हो सके।
Author: Chhattisgarhiya News
सच्ची बात सिर्फ छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के साथ








