विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन विवादों में, दुर्गाबाड़ी परिसर में जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश और धार्मिक स्थल के सामने मंच बनाए जाने पर भाजपा नेता अमित गुप्ता ने जताया
बतौली। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बाजार रोड स्थित दुर्गाबाड़ी परिसर में आयोजित कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सर्व आदिवासी समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं आमजन शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर की धार्मिक मर्यादाओं का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेता अमित गुप्ता ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल पर जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश करना तथा जहां देवी-देवता की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है, उसके सामने मंच बनाकर कार्यक्रम आयोजित करना स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
अमित गुप्ता ने कहा कि सरगुजा की अपनी विशिष्ट रीति-नीति और सांस्कृतिक परंपराएं रही हैं। हिंदू धार्मिक स्थलों पर प्रवेश करते समय जूते-चप्पल उतारना सदियों से चली आ रही परंपरा है। ऐसे में धार्मिक स्थल के परिसर में सार्वजनिक रूप से जूते-चप्पल पहनकर कार्यक्रम में शामिल होना और धार्मिक स्थल के सामने मंच बनाकर कार्यक्रम आयोजित करना श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाला है।
उन्होंने कार्यक्रम के दौरान धर्म विशेष के गीत बजाए जाने को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि आदिवासी समाज के आयोजन के नाम पर किसी भी धार्मिक स्थल की मर्यादा एवं स्थानीय धार्मिक भावनाओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा कि आदिवासी समाज और हिंदू समाज के बीच सरगुजा में सदियों से सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। आदिवासियों के नाम पर हिंदू धर्म, संस्कृति और धार्मिक आस्थाओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में यदि किसी धार्मिक स्थल पर इसी प्रकार धार्मिक मर्यादाओं की अनदेखी करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तो इसका खुलकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने आयोजकों से भी अपील की कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते समय संबंधित धार्मिक स्थल की परंपराओं, मर्यादाओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाए।
अमित गुप्ता ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजन का उद्देश्य समाज को जोड़ना और आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं को सम्मान देना होना चाहिए, न कि किसी धर्म या धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाना।
Author: Chhattisgarhiya News
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