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जांच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर की गई विभागीय कार्रवाई

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जांच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर की गई विभागीय कार्रवाई

कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद दर्ज कराई गई एफआईआर

 

अम्बिकापुर 18 जुलाई 2026/ कार्यालय उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, जिला सरगुजा द्वारा समाचार पत्र में प्रकाशित “बिना जांच रिपोर्ट एफआईआर, कर्मचारी 100 दिन जेल में बिताने को हुआ मजबूर” शीर्षक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया है। विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित खबर तथ्यहीन, निराधार एवं उपलब्ध अभिलेखों के विपरीत हैं तथा विभागीय कार्रवाई नियमानुसार की गई है।

 

विभाग द्वारा दिए गए जानकारी के अनुसार संबंधित प्रकरण में लगभग 1 करोड़ 7 लाख रुपये के कथित गबन की जांच उपसंचालक स्तर पर गठित जांच समिति द्वारा की गई थी। जांच के दौरान भारतीय स्टेट बैंक स्थित विभागीय खाते के बैंक स्टेटमेंट, सीजीटीसी से प्राप्त रसीदों एवं अन्य अभिलेखों का मिलान कर जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया। जांच में संबंधित राशि बैंक खाते में जमा नहीं होना प्रमाणित पाए जाने पर 25 सितम्बर 2025 को जांच प्रतिवेदन पुलिस थाना कोतवाली, अम्बिकापुर को उपलब्ध कराया गया। इसके बाद 10 जनवरी 2026 का अतिरिक्त जांच प्रतिवेदन भी पुलिस को सौंपा गया, जो न्यायालय में प्रस्तुत चालान के साथ संलग्न है।

 

विभाग ने स्पष्ट किया है कि समाचार पत्र में जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं होने तथा बिना जांच के एफआईआर दर्ज किए जाने की खबर पूरी तरह निराधार है। विभाग के अनुसार दोनों जांच प्रतिवेदन पुलिस को उपलब्ध कराए जा चुके हैं तथा न्यायालय में प्रस्तुत अभिलेखों का हिस्सा हैं।

 

विभाग द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया है कि जांच प्रतिवेदन के आधार पर तत्कालीन सहायक ग्रेड-2 श्री प्रदीप कुमार अंबष्ट को 12 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के माध्यम से उनसे बैंक खाते में जमा नहीं हुई राशि का स्पष्टीकरण एवं अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया, किंतु उनके द्वारा कोई संतोषजनक एवं समाधानकारक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके उपरांत नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

 

विभाग के अनुसार संबंधित कर्मचारी से प्रभार लिए जाने के बाद पुनः विस्तृत जांच कराई गई, जिसमें सीजीटीसी से प्राप्त 1 करोड़ 89 लाख 4 हजार 831 रुपये की राशि बैंक खाते में जमा होना नहीं पाया गया। पशु रोगी कल्याण समिति की 63 लाख 29 हजार 640 रुपये एवं 37 लाख 27 हजार 853 रुपये कुल 2 करोड़ 98 लाख 14 हजार 544 रुपये के संबंध में भी संबंधित कर्मचारी द्वारा कोई संतोषजनक लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया गया। इन सभी तथ्यों एवं दस्तावेजों को पुलिस जांच के दौरान उपलब्ध कराया गया है तथा वे न्यायालय में प्रस्तुत चालान का हिस्सा हैं।

 

विभाग ने समाचार में प्रकाशित ’’दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए’’ ’’चालान पेश होने पर जांच की पोल खुली’’ तथा “जांच समिति का गठन नहीं हुआ’’ खबर निराधार हैं। विभाग के अनुसार जांच समिति का विधिवत गठन किया गया था तथा जांच से संबंधित समस्त दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। विभाग का कहना है कि प्रकाशित समाचार में इन तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे आमजन के समक्ष भ्रामक स्थिति उत्पन्न हुई।

 

कार्यालय उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, सरगुजा ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि संबंधित प्रकरण वर्तमान में माननीय जिला एवं सत्र न्यायालय, सरगुजा में विचाराधीन है। न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण का ट्रायल जारी है।

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Author: Chhattisgarhiya News

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