रामगढ़ और हसदेव की रक्षा के लिए हजारों लोग हुए एकजुट, प्राकृतिक संसाधनों की अंधाधुंध लूट के खिलाफ बुलंद हुई आवाज
अम्बिकापुर। रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति द्वारा आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए हजारों ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने रामगढ़ एवं हसदेव क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजनाओं का विरोध करते हुए जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लिया। भीषण गर्मी के बावजूद लगभग 5 से 6 हजार लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधनों की लगातार लूट हो रही है और एक के बाद एक कोयला, बॉक्साइट एवं लौह अयस्क खदानों को मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ का अस्तित्व संकट में है और प्राकृतिक धरोहरों को बचाने के लिए पूरे प्रदेश को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक स्थलों के आसपास नई निर्माण योजनाएं सरकार की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं तथा रामगढ़ क्षेत्र में चट्टानों में आ रही दरारों को लेकर भी चिंता जताई।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आदिवासी समाज ने हमेशा अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने वीर नारायण सिंह और वीर गुंडाधूर जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की लड़ाई आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगातार खदानों का विस्तार हो रहा है और शांतिपूर्ण विरोध करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा ने कहा कि देश में एक बार फिर कंपनी राज स्थापित करने की कोशिश हो रही है और जनता के संसाधनों पर बड़े कॉरपोरेट समूहों का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि संगठित जनशक्ति ही बड़ी ताकतों का मुकाबला कर सकती है।
सर्व आदिवासी समाज के विनोद नागवंशी ने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र के लोग आज भी बेरोजगारी और विस्थापन की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल सरगुजा नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की समस्या है।
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के सामाजिक कार्यकर्ता रमाकांत ने कहा कि जंगलों की लगातार कटाई से भविष्य में जल संकट गहराने की आशंका है और यह पूरे प्रदेश के अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है।
हसदेव बचाव मंच के आलोक शुक्ला ने जानकारी दी कि केते एक्सटेंशन परियोजना के तहत लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र में 7 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, जबकि आगे अन्य कोल परियोजनाओं में भी बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र प्रभावित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते व्यापक जनआंदोलन नहीं हुआ तो रामगढ़ सहित कई प्राकृतिक जल स्रोत और वन क्षेत्र गंभीर संकट में पड़ जाएंगे।
कार्यक्रम में रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के सिद्धार्थ सिंहदेव, राजनाथ सिंह, ओम प्रकाश सिंह, अनिल अग्रवाल, सुनीता पोर्ते, गंगा राम पैंकरा, ए.आर. कोरार्म, सुदेश टिकम सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।
इस दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में लगातार हो रहे हवाई सर्वेक्षण को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए आशंका जताई कि भविष्य में उनके गांवों में भी नई खदानें खोली जा सकती हैं। उन्होंने सरकार से प्राकृतिक धरोहरों, जल स्रोतों और आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में सरगुजा, सूरजपुर, सीतापुर, बतौली, मैनपाट, लखनपुर, अम्बिकापुर, प्रेमनगर, श्रीनगर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सामाजिक कार्यकर्ता, जनआंदोलन से जुड़े प्रतिनिधि और हजारों ग्रामीण शामिल हुए तथा रामगढ़ एवं हसदेव के संरक्षण के लिए सामूहिक संघर्ष का संकल्प लिया।
Author: Chhattisgarhiya News
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