सरगुजा में औद्योगिक लापरवाही का भयावह चेहरा मां कुदरगढ़ी एल्यूमिनियम रिफाइनरी प्लांट में मजदूर की मौत, एंबुलेंस तक नहीं—प्रबंधन पर गंभीर आरोप
बतौली (सरगुजा) सरगुजा जिले के सिलसिला स्थित मां कुदरगढ़ी एल्यूमिनियम रिफाइनरी प्लांट में कार्यरत एक मजदूर की भीषण सड़क दुर्घटना में हुई दर्दनाक मौत ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था और फैक्ट्री प्रबंधन की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। मृतक मजदूर अनिल नाई, पिता सुखदेव नाई, उम्र लगभग 40 वर्ष, निवासी ग्राम झेरडीह हर्षाडांड, बीते दो वर्षों से उक्त फैक्ट्री में मजदूरी कर रहा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार को ड्यूटी समाप्त कर जब मजदूर प्लांट गेट से बाहर निकल रहा था, तभी ट्रेलर क्रमांक HR 58 E 5154 के चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उसे टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। दुर्घटना के बाद मजदूर गंभीर रूप से घायल अवस्था में लगभग 20 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान के बावजूद फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा न तो एंबुलेंस की व्यवस्था की गई और न ही कोई तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
अंततः घायल मजदूर को निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मजदूरों का आरोप है कि यदि समय पर एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार की सुविधा मिल जाती, तो अनिल नाई की जान बचाई जा सकती थी।
यह घटना फैक्ट्री प्रबंधन की घोर लापरवाही, अमानवीय रवैये और मजदूरों की सुरक्षा के प्रति घोर उदासीनता को दर्शाती है। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये का उद्योग संचालित करने वाला प्रबंधन यदि एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं करा सकता, तो उसकी आपदा प्रबंधन और सुरक्षा तैयारियां आखिर क्या हैं?
नियमों की खुली अवहेलना के आरोप
मजदूरों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में कार्यरत हजारों मजदूरों को न तो ईएसआई का लाभ दिया जा रहा है और न ही किसी प्रकार का वैधानिक बीमा, जिससे दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में कंपनी जिम्मेदारी से बच निकलती है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी फैक्ट्री में कार्यरत चार मजदूरों की मौत हो चुकी है, जो बिहार के निवासी थे। अब प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या इस बार स्थानीय मजदूर के परिवार को न्याय और उचित मुआवजा मिलेगा या नहीं।
कानूनी जिम्मेदारी से बच रहा प्रबंधन?
कानून के अनुसार फैक्ट्री गेट या परिसर के आसपास हुई दुर्घटना की स्थिति में प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है कि वह तत्काल पुलिस, फैक्ट्री इंस्पेक्टर को सूचना दे, कारखाना अधिनियम की धारा 88 के तहत रिपोर्ट प्रस्तुत करे, तथा कर्मचारी क्षतिपूर्ति/ईएसआई अधिनियम के अंतर्गत मृतक के आश्रितों को मुआवजा उपलब्ध कराए। लेकिन इस मामले में प्रबंधन की ओर से अब तक इन दायित्वों के निर्वहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परिजनों की मांग—न्याय नहीं मिला तो आंदोलन
मृतक के परिजन और स्थानीय मजदूर संगठन फैक्ट्री प्रबंधन से तत्काल उचित मुआवजा, दोषी ट्रक चालक की गिरफ्तारी और प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
प्रशासन से मांग की जाती है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी ट्रक चालक एवं फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए फैक्ट्री में अनिवार्य सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की जाएं।
Author: Chhattisgarhiya News
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