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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला : जातिसूचक शब्द मात्र बोलने से अपराध नहीं

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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला : जातिसूचक शब्द मात्र बोलने से अपराध नहीं

बिलासपुर, 28 सितम्बर 2025 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर की न्यायमूर्ति श्रीमती रजनी दुबे की एकलपीठ ने 17 वर्ष पुराने अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट) से जुड़े प्रकरण में अहम निर्णय सुनाया है।

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि —
➡️ यदि केवल जातिसूचक शब्द बोले गए हों और उनमें किसी को अपमानित करने अथवा नीचा दिखाने की मंशा न हो, तो यह अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा।

➡️ शिक्षिका अनीता सिंह ठाकुर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।

➡️ अदालत ने कहा कि किसी भी घटना में “अपमानित करने की भावना” का प्रमाणित होना आवश्यक है, मात्र शब्दों के आधार पर अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता।

➡️ न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि कथित घटना के समय शिकायतकर्ता का जाति प्रमाणपत्र घटना के बाद जारी हुआ था और उसकी वैधता भी सीमित पाई गई।

➡️ गवाहों के बयान से यह भी सिद्ध हुआ कि शिक्षिका ने कभी भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं किया।

इस आदेश के माध्यम से हाई कोर्ट ने दोहराया कि एससी/एसटी एक्ट का दुरुपयोग रोकना जरूरी है और इसका प्रयोग केवल वास्तविक एवं प्रमाणित मामलों में ही होना चाहिए।

यह फैसला समाज में विधि की गरिमा, निष्पक्षता और न्याय की भावना को सुदृढ़ करने वाला माना जा रहा है।

Chhattisgarhiya News
Author: Chhattisgarhiya News

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