हाईकोर्ट से बड़ी राहत : कृषक सहकारी विपणन संघ के सेवानिवृत्त कर्मचारी किशन गुप्ता के विरुद्ध वसूली आदेश निरस्त
बिलासपुर, 2025 माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ लिमिटेड, जिला कार्यालय बिलासपुर के सेवानिवृत्त वरिष्ठ सहायक किशन गुप्ता को बड़ी राहत प्रदान की है।
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय की एकलपीठ ने श्री गुप्ता द्वारा दायर रिट याचिका (WPS No. 6144/2011) पर सुनवाई करते हुए सहकारी मंत्री तथा अतिरिक्त पंजीयक सहकारी समितियों द्वारा पारित वसूली आदेशों को निरस्त कर दिया।
मामले का विवरण इस प्रकार है कि वर्ष 2005-06 में श्री गुप्ता भरणीभाठा, बिलासपुर के धान खरीदी केन्द्र में प्रभारी के रूप में पदस्थ थे। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर उन पर करोड़ों रुपये की हानि का आरोप लगाया गया और 87,97,220 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्री एच.एस. अहलूवालिया ने तर्क रखा कि –
विभाग ने जांच प्रक्रिया उचित तरीके से नहीं की,
दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए,
गवाहों से जिरह का अवसर नहीं दिया गया,
तथा संपूर्ण जांच उनकी अनुपस्थिति में की गई।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 की धारा 58-बी के तहत किसी भी कर्मचारी पर हानि का आरोप तय करने के लिए सुनवाई का उचित अवसर दिया जाना आवश्यक है। चूँकि इस मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं हुआ, अतः वसूली आदेश न्यायोचित नहीं है।
अदालत ने दिनांक 30.09.2010 के अतिरिक्त पंजीयक तथा दिनांक 13.09.2011 के सहकारी मंत्री द्वारा पारित आदेशों को निरस्त करते हुए कहा कि यदि विभाग चाहे तो अधिनियम की धारा 58-बी के अनुसार नया जांच प्रक्रम विधिसम्मत रूप से प्रारंभ कर सकता है।
इस निर्णय से सहकारी क्षेत्र के कर्मचारियों को एक महत्वपूर्ण संदेश मिला है कि किसी भी वसूली अथवा दंडात्मक कार्रवाई से पूर्व उचित सुनवाई और न्यायोचित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
Author: Chhattisgarhiya News
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