जज ने DSP को भेजा जेल: मद्रास हाईकोर्ट ने दिया दखल
हाल ही में तमिलनाडु में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया, जहाँ एक जिला जज ने एक पुलिस उपाधीक्षक (DSP) को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया। इस आदेश को मद्रास हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है और इस घटना की गहन जांच के आदेश दिए हैं।
मामले की पूरी कहानी:
यह पूरा मामला जुलाई 2025 में कांचीपुरम में एक बेकरी में हुए एक झगड़े से शुरू हुआ था। इस झगड़े में जिला जज के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) और एक परिवार शामिल था।
झगड़ा और सुलह: शुरुआती तौर पर, दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत से मामला सुलझा लिया था और शिकायतें दर्ज नहीं कराई गईं।
दबाव और FIR: बाद में, आरोप लगे कि जिला जज के दबाव में पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की।
जज का चौंकाने वाला आदेश: जिला जज ने DSP को इसलिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया, क्योंकि उन्होंने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में कार्रवाई करने में कथित तौर पर देरी की थी।
पुलिस का आरोप: पुलिस विभाग ने जज के इस आदेश पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह कदम व्यक्तिगत नाराजगी का नतीजा था। पुलिस के अनुसार, जज अपने पूर्व PSO से नाराज थे, जिसके चलते उन्होंने बदले की भावना से यह आदेश दिया।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल DSP को रिहा करने का आदेश दिया और जज के आदेश को रद्द कर दिया।
जांच के आदेश: हाईकोर्ट ने इस मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (सतर्कता) को इस घटना की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या जज ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया था और क्या उनके फैसले के पीछे कोई व्यक्तिगत पूर्वाग्रह था।
इस मामले ने न्यायपालिका और पुलिस के बीच संबंधों पर सवाल उठाए हैं। देखना यह होगा कि जाँच के बाद क्या निष्कर्ष निकलता है।
Author: Chhattisgarhiya News
सच्ची बात सिर्फ छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के साथ








