शराबखोरी और लापरवाह ड्राइविंग: कब रुकेगा मौत का सिलसिला?
बतौली / बतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हाल ही में डॉक्टरों के तबादले से जुड़े विवादों ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। कभी विधायक और उनके पीए पर अभद्रता के आरोप, तो कभी मीडिया पर दबाव बनाने के आरोप चर्चा में रहे। लेकिन असली सवाल यह है कि इन विवादों के पीछे की जड़ क्या है?
जवाब है—शराबखोरी और लापरवाह ड्राइविंग।
बीते दिनों शराब के नशे में गाड़ी चलाने के कारण हुई दुर्घटना ने दो मासूमों की जान ले ली और एक निर्दोष व्यक्ति की जिंदगी तबाह कर दी। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक व्यवस्था पर सवाल है। आखिर कब तक शासन हाथ पर हाथ धरे बैठेगा? कब तक शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले बेखौफ सड़कों पर मौत बाँटते रहेंगे?
सड़क पर चेकिंग के नाम पर केवल मालवाहक गाड़ियों को रोकना और जांच करना आम बात हो गई है, जबकि दुर्घटनाओं का बड़ा कारण अक्सर बाइक और लग्जरी कारें होती हैं, जिनकी चेकिंग शायद ही कभी होती हो। पिकअप गाड़ियों को कठोरता से रोकने का कोई औचित्य नहीं, क्योंकि वे प्रायः स्थानीय व्यापार में लगे लोग चलाते हैं, जो यातायात नियमों का पालन करते हैं।
समय आ गया है कि प्रशासन कठोर कदम उठाए—
✅ शराब पीकर गाड़ी चलाने पर सख्त सजा
✅ सभी वाहनों की सख्त चेकिंग, चाहे वह लग्जरी कार हो या बाइक
✅ नियमित नाइट पेट्रोलिंग और ब्रीथ एनालाइजर का उपयोग
यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो नशे में ड्राइविंग और जानलेवा हादसे हमारे समाज के लिए एक अभिशाप बने रहेंगे।
अब जागने का समय है—क्योंकि सड़कें सुरक्षित हों, यह हर नागरिक का अधिकार है।
Author: Chhattisgarhiya News
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