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सारे दावों की खुली पोल: खराब खान-पान और लचर शिक्षा व्यवस्था से परेशान छात्राएं, डेढ़ महीने से अंधेरे में पढ़ाई—पैदल चलकर कलेक्टर के पास पहुंचीं बेटियां

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सारे दावों की खुली पोल: खराब खान-पान और लचर शिक्षा व्यवस्था से परेशान छात्राएं, डेढ़ महीने से अंधेरे में पढ़ाई—पैदल चलकर कलेक्टर के पास पहुंचीं बेटियां

अंबिकापुर/बतौली। आदिवासी विकास और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत उस समय सामने आ गई, जब सरगुजा जिले के बतौली ब्लॉक स्थित शिवपुर एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की छात्राओं को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए करीब 30 किलोमीटर दूर अंबिकापुर तक पैदल मार्च करना पड़ा।

हॉस्टल में लंबे समय से बिजली व्यवस्था ठप होने, मेस में साफ-सफाई की खराब स्थिति और पढ़ाई की व्यवस्था से नाराज छात्राएं कलेक्टर से शिकायत करने के लिए सड़क पर उतर गईं। छात्राओं के इस कदम से प्रशासन में हड़कंप मच गया। रास्ते में अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्राएं अपनी शिकायतों का समाधान होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हुईं।

बाद में प्रशासन ने बीच रास्ते में बस की व्यवस्था कर छात्राओं को कलेक्टोरेट पहुंचाया। हालांकि, लंबी पैदल यात्रा और थकान के चलते कलेक्टोरेट पहुंचने के बाद एक छात्रा अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी, जिसके बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

हॉस्टल की बदहाली ने खोली व्यवस्था की पोल

छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल में करीब एक महीने से बिजली की समस्या बनी हुई है। पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मेस में साफ-सफाई और भोजन व्यवस्था को लेकर भी छात्राओं ने नाराजगी जताई।

इसके अलावा छात्राओं ने फिजिक्स और केमिस्ट्री की पढ़ाई ठीक से नहीं होने की शिकायत भी कलेक्टर के सामने रखी। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने साधा निशाना

मामले को लेकर पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों के लिए सरकार करोड़ों रुपये का बजट उपलब्ध कराती है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कलेक्टर ने मानी तीन प्रमुख शिकायतें

कलेक्टर अजीत वसंत से मुलाकात के दौरान छात्राओं ने मुख्य रूप से तीन समस्याएं रखीं—

करीब एक महीने से बिजली की समस्या

मेस में साफ-सफाई की खराब व्यवस्था

फिजिक्स और केमिस्ट्री की पढ़ाई को लेकर शिकायत

कलेक्टर ने बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए CSPDCL को निर्देश देने, साफ-सफाई दुरुस्त कराने और शिक्षकों से जुड़ी शिकायतों पर व्यवस्था सुधारने की बात कही है।

अब सबसे बड़ा सवाल—कार्रवाई कब?

छात्राओं का सड़क पर उतरना सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि आदिवासी अंचल में आवासीय शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल है। यदि वास्तव में हॉस्टल में लंबे समय से बिजली, भोजन और शिक्षा से जुड़ी समस्याएं थीं, तो निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी इतने दिनों तक क्या कर रहे थे?

क्या छात्राओं को अपनी समस्याएं सुनाने के लिए 30 किलोमीटर पैदल चलना जरूरी था? क्या एक छात्रा के बेहोश होने के बाद ही प्रशासन की जिम्मेदारी तय होगी?

अब देखना होगा कि कलेक्टर के निर्देशों के बाद सिर्फ व्यवस्थाएं सुधरती हैं या फिर लापरवाही के लिए जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन और अधिकारियों पर भी निलंबन अथवा अन्य दंडात्मक कार्रवाई होती है।

Chhattisgarhiya News
Author: Chhattisgarhiya News

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