संस्कारों का हस्तांतरण कमजोर हुआ तो समाज का क्षय निश्चित : संतोष दास ‘सरल’
अंबिकापुर। समसामयिक विश्लेषक संतोष दास ‘सरल’ ने वर्तमान सामाजिक परिवेश, युवाओं के बदलते व्यवहार और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संस्कारों का सही ढंग से हस्तांतरण नहीं हुआ तो समाज का क्षय होना निश्चित है। उन्होंने कहा कि अश्लीलता अब दबे पांव नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से खुले तौर पर घर-घर तक पहुंच रही है और इसे आधुनिक सोच या नया ट्रेंड मानकर स्वीकार करना समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने हाल के छात्र आंदोलनों के संदर्भ में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन विरोध की भाषा और तरीका मर्यादित एवं सभ्य होना चाहिए। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन में अशोभनीय भाषा और अभद्र व्यवहार सामाजिक मूल्यों को कमजोर करते हैं तथा इसका दूरगामी प्रभाव नई पीढ़ी पर पड़ता है।
संतोष दास ‘सरल’ ने कहा कि भारतीय समाज की पहचान उसके संस्कार, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों से रही है। यदि इन्हें आधुनिकता के नाम पर उपेक्षित किया गया तो भविष्य में समाज को गंभीर सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के सभी वर्गों से युवाओं को नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और सभ्य आचरण के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस दौर में आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ नैतिक शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उनका मानना है कि एक सशक्त और सभ्य समाज का निर्माण केवल तकनीकी विकास से नहीं, बल्कि संस्कारों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से होता है।
Author: Chhattisgarhiya News
सच्ची बात सिर्फ छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के साथ







