Search
Close this search box.

फैक्ट्री के गेट के सामने सड़क दुर्घटना में मजदूर की हुई मौतफैक्ट्री निरीक्षण विभाग के निरीक्षण एवं कार्य शैली पर उठे सवाल

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

औद्योगिक लापरवाही ने ली मजदूर की जान, फैक्ट्री प्रबंधन की संवेदनहीनता उजागर

सरगुजा |  श्रम विभाग के अंतर्गत कार्यरत फैक्ट्री निरीक्षण विभाग (कारखाना निदेशालय), जो कारखाना अधिनियम 1948 के तहत श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है, उसकी भूमिका पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सरगुजा जिले के सिलसिला स्थित मां कुदरगढ़ी एल्यूमिनियम रिफाइनरी प्लांट में कार्यरत एक मजदूर की भीषण सड़क दुर्घटना में हुई दर्दनाक मौत ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था और फैक्ट्री प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक मजदूर अनिल नाई, पिता सुखदेव नाई, उम्र लगभग 40 वर्ष, निवासी ग्राम झेरडीह हर्षाडांड, बीते दो वर्षों से उक्त फैक्ट्री में मजदूरी कर रहा था।

बुधवार को ड्यूटी समाप्त कर जब वह प्लांट गेट से बाहर निकल रहा था, तभी ट्रेलर क्रमांक HR 58 E 5154 के चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उसे टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया।

दुर्घटना के बाद मजदूर लगभग 20 मिनट तक गंभीर रूप से घायल अवस्था में सड़क पर तड़पता रहा, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान के बावजूद फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा न तो एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई और न ही कोई तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई।

अंततः घायल मजदूर को निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मजदूरों का स्पष्ट आरोप है कि यदि समय पर एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार की सुविधा मिल जाती, तो अनिल नाई की जान बचाई जा सकती थी।

यह घटना फैक्ट्री प्रबंधन की घोर लापरवाही, अमानवीय रवैये और मजदूरों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता को दर्शाती है। करोड़ों रुपये का उद्योग संचालित करने वाला प्रबंधन यदि एम्बुलेंस, प्राथमिक चिकित्सा और आपदा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करा सकता, तो उसकी सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद फैक्ट्री निरीक्षण विभाग की कार्यवाही केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। निरीक्षण के दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता में फैक्ट्री संचालक मनमानी कर रहे हैं और दुर्घटनाओं के बाद भी कोई ठोस, उदाहरणात्मक कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।

यह मामला न केवल एक मजदूर की मौत का है, बल्कि पूरी औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था, श्रम विभाग की निगरानी और शासन की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

अब देखना यह है कि क्या श्रम विभाग, फैक्ट्री निरीक्षण विभाग और जिला प्रशासन

👉 दोषी फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई करेगा,

👉 मृतक के परिजनों को न्याय और मुआवजा दिलाएगा,

या फिर यह मामला भी अन्य हादसों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

Chhattisgarhiya News
Author: Chhattisgarhiya News

सच्ची बात सिर्फ छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के साथ

Leave a Comment

और पढ़ें