मनरेगा से VB-G RAM G तक: नाम परिवर्तन या नीति का नया अध्याय
नई दिल्ली |भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बड़े बदलाव की चर्चा सामने आई है। प्रस्ताव है कि मनरेगा का नाम बदलकर
“विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” किया जाए, जिसका संक्षिप्त नाम VB-G RAM G (जी राम जी) होगा।
सरकार का दावा है कि यह पहल 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी। इस प्रस्ताव में केवल नाम परिवर्तन ही नहीं, बल्कि योजना के ढांचे, रोजगार के दिनों और भुगतान प्रणाली में भी महत्वपूर्ण सुधार शामिल हैं।
प्रस्तावित बदलावों के प्रमुख बिंदु
1. नया नाम और पहचान
मनरेगा → VB-G RAM G (जी राम जी)
फोकस: रोजगार के साथ-साथ आजीविका और ग्रामीण अवसंरचना का सशक्तिकरण
2. रोजगार के दिनों में वृद्धि
वर्तमान में 100 दिन के स्थान पर 125 दिन प्रति परिवार प्रति वर्ष रोजगार देने का प्रस्ताव
3. भुगतान व्यवस्था में सुधार
15 दिनों के भीतर भुगतान की मौजूदा व्यवस्था के बजाय साप्ताहिक भुगतान प्रणाली लागू करने की योजना
4. दीर्घकालिक लक्ष्य
ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ अवसंरचना का निर्माण
पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी को बढ़ावा
2047 तक “विकसित भारत” के विजन को साकार करना
सकारात्मक पहलू
रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी से गरीब, भूमिहीन और मजदूर वर्ग की आय सुरक्षा मजबूत हो सकती है। साप्ताहिक भुगतान से मजदूरों की नकदी समस्या कम होगी और साहूकारों पर निर्भरता घटेगी।
इसके अलावा जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, सिंचाई और कृषि-आधारित परिसंपत्तियों पर फोकस से स्थायी ग्रामीण विकास को बल मिल सकता है।
उठते सवाल और आशंकाएं
विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार (Right to Work) है। नाम परिवर्तन से इसकी कानूनी मजबूती और महात्मा गांधी से जुड़ी नैतिक पहचान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
साथ ही 125 दिन का रोजगार और साप्ताहिक भुगतान तभी संभव होगा जब केंद्र सरकार समय पर पर्याप्त बजट उपलब्ध कराए और राज्यों को तकनीकी व प्रशासनिक सहयोग मिले। अन्यथा भुगतान में देरी और काम ठप होने की समस्या बनी रह सकती है।
निष्कर्ष
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह बदलाव वास्तविक सुधार है या केवल नाम बदलकर पुरानी समस्याओं पर पर्दा डालने की कोशिश।
यदि मनरेगा की मूल भावना—
“मांग पर काम, समय पर भुगतान और कानूनी गारंटी”—को कमजोर किए बिना इसे आधुनिक बनाया जाता है, तो यह ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
Author: Chhattisgarhiya News
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