Search
Close this search box.

छिन गया आजीविका का साधन, नहीं मिली कोई मदद तीन दिव्यांग भाइयों और बुजुर्ग मां के सामने भुखमरी का संकट

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

छिन गया आजीविका का साधन, नहीं मिली कोई मदद

तीन दिव्यांग भाइयों और बुजुर्ग मां के सामने भुखमरी का संकट

सरगुजा/अंबिकापुर। बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम सुआरपारा में निवासरत एक गरीब परिवार आज गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है। परिवार में तीन सगे भाई और एक बुजुर्ग मां हैं, जिनमें से चार सदस्य 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण और प्राकृतिक आपदा के बाद इस परिवार का एकमात्र आजीविका का साधन पूरी तरह नष्ट हो गया, लेकिन बार-बार आवेदन और अधिकारियों से गुहार के बावजूद अब तक किसी भी प्रकार की ठोस सहायता नहीं मिल पाई है।

परिवार के सदस्य बृजेश शुक्ला, राजेश शुक्ला और विदू शुक्ला अस्थि एवं श्रवण दिव्यांगता से ग्रसित हैं। उनकी बुजुर्ग मां भी शारीरिक रूप से अत्यंत कमजोर हैं और नियमित रूप से कार्य करने में असमर्थ हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक परिवार की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक थी। घर पर ही आटा चक्की और तेल निकालने की मशीन लगाकर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण हो रहा था।

राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान उचित जल निकासी व्यवस्था नहीं की गई, जिससे एक रात तेज बारिश में घर पूरी तरह प्रभावित हो गया। मिट्टी का मकान ढह गया और आटा चक्की तथा तेल मशीनें मलबे में दब गईं। परिवार बेघर होने की कगार पर आ गया। प्राकृतिक आपदा मद से मिली नाममात्र की राशि से केवल टूटी दीवारें ठीक कर किसी तरह रहने लायक जगह बनाई जा सकी, लेकिन आजीविका के साधन पूरी तरह समाप्त हो गए।

इसके बाद राजेश शुक्ला द्वारा जनपद, तहसील और जिला स्तर पर कई बार आवेदन दिए गए। अधिकारियों से प्रत्यक्ष मुलाकात कर अपनी पीड़ा बताई गई कि दिव्यांगता के कारण वे कोई अन्य काम करने में सक्षम नहीं हैं और आजीविका पुनः शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता अत्यंत आवश्यक है, लेकिन आज तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिले।

स्थिति और भी गंभीर तब हो गई जब मशीनों की खराबी और कोरोना काल के कारण बिजली बिल बढ़कर एक लाख रुपये से अधिक हो गया, जिसके कारण कनेक्शन भी विच्छेदित कर दिया गया। सड़क निर्माण के बाद घर सड़क से कई फीट नीचे हो गया है, जिससे बरसात में घर में पानी और कीचड़ भर जाता है। यदि सड़क और घर के बीच की जगह को मिट्टी-मुरम से पाट दिया जाए तो बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन यह कार्य भी अब तक नहीं हो पाया है।

परिवार का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है। बस चावल मिल रहा है आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि दो वक्त का भोजन जुटाना भी कठिन हो गया है। नौ सदस्यीय परिवार में चार लोग 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग होने के कारण हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं।

परिवार ने शासन-प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता, आजीविका पुनर्स्थापना हेतु अनुदान, बिजली बकाया में राहत और घर के आसपास आवश्यक भराव कार्य कराए जाने की मांग की है। पीड़ित परिवार ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि यदि समय रहते सहयोग नहीं मिला तो उनके सामने आत्महत्या जैसा कठोर कदम ही एकमात्र विकल्प बच सकता है।

यह मामला न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा है, बल्कि समाज के प्रति शासन की जिम्मेदारी का भी सवाल खड़ा करता है।

 

Chhattisgarhiya News
Author: Chhattisgarhiya News

सच्ची बात सिर्फ छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के साथ

Leave a Comment

और पढ़ें