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सरगुजा जिले में धान रीसायक्लिंग का अवैध तंत्र उजागर, प्रशासन की कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल

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सरगुजा जिले में धान रीसायक्लिंग का अवैध तंत्र उजागर, प्रशासन की कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल

अंबिकापुर / सरगुजा जिले में धान उपार्जन केंद्र प्रभारियों एवं राइस मिलों के गठजोड़ से व्यापक स्तर पर धान रीसायक्लिंग का अवैध कारोबार संचालित होने का मामला लगातार सामने आ रहा है। इसका ताजा और गंभीर उदाहरण लखनपुर क्षेत्र से सामने आया है, जहां भौतिक सत्यापन के दौरान जगदंबा राइस मिल में लगभग 2600 कुंटल धान कम पाया गया। यह स्थिति न केवल संदेहास्पद है, बल्कि यह स्पष्ट संकेत देती है कि धान का अवैध रूप से गायब होना एक सुनियोजित तंत्र के तहत किया जा रहा है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रशासन जहां छोटे व्यापारियों पर सख्ती और शक्ति प्रदर्शन करता नजर आता है, वहीं धान उपार्जन केंद्र प्रभारी और राइस मिलों के बीच कथित रूप से “60 गांठ” के हिसाब से अवैध धान खरीदी-बिक्री का खेल खुलेआम चल रहा है। यह दोहरा मापदंड प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

छत्तीसगढ़ राज्य में जब से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था शुरू हुई है, तब से छोटे व्यापारी, जो पहले बाजारहाट में पट्टा के जरिए 2-4 या 10 किलो धान का सीमित कारोबार करते थे, उनका व्यवसाय पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। आज स्थिति यह है कि धान मानो “अफीम” बन गया हो — उसे देखना तक जोखिम भरा हो गया है। प्रशासनिक कार्रवाई के डर से छोटे व्यापारी धान से दूरी बना रहे हैं। यदि कोई बड़ा व्यापारी धान लेकर आता है, तो छोटे व्यापारी हाथ जोड़कर यह कहने को मजबूर हैं कि धान खरीदी के बाद ही भुगतान मिल पाएगा।

ऐसी विषम परिस्थितियों में यह सवाल अत्यंत महत्वपूर्ण है कि बड़े स्तर पर धान उपार्जन केंद्र प्रभारी एवं राइस मिलों द्वारा की जा रही अवैध खरीद-बिक्री आखिर किस नियम और कानून के तहत जायज ठहराई जा रही है? जब 2600 कुंटल जैसे बड़े पैमाने पर धान की कमी सामने आती है, तो क्या प्रशासन भारतीय दंड संहिता की धारा 420 सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध करेगा, या फिर केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

जनता यह जानना चाहती है कि क्या कानून केवल छोटे और कमजोर व्यापारियों के लिए है, या फिर बड़े और प्रभावशाली लोगों पर भी समान रूप से लागू होगा। सरगुजा जिले में धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई अब समय की मांग है।

Chhattisgarhiya News
Author: Chhattisgarhiya News

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