बतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों का गंभीर अभाव, एक डॉक्टर के भरोसे ब्लॉक की स्वास्थ्य व्यवस्था
बतौली (सरगुजा)। सरगुजा जिले के विकासखंड मुख्यालय बतौली का एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) आज बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रतीक बनता जा रहा है। हैरानी और चिंता की बात यह है कि पूरे ब्लॉक की चिकित्सा व्यवस्था अब लगभग एक ही डॉक्टर के भरोसे संचालित हो रही है।
वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर शासन द्वारा अनुबंध पर एमबीबीएस डॉक्टर रखे गए हैं, लेकिन व्यवहारिक स्थिति यह है कि डॉ. अर्चना मिश्रा एवं डॉ. अखिलेश भारत सिंह को सप्ताह में मात्र तीन दिन के लिए ही रखा गया है। वर्तमान में डॉ. अखिलेश भारत सिंह जनवरी माह से सेवाएँ दे रही हैं, जबकि डॉ. अर्चना मिश्रा प्रसूति अवकाश पर हैं। ऐसे में पूरे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जिम्मेदारी मेडिकल ऑफिसर डॉ. संस्कृति गुप्ता पर आ टिकी है, जिन पर मरीजों के उपचार से लेकर संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के निरीक्षण का भार है।
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है— क्या एक ब्लॉक मुख्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में योग्य और जिम्मेदार डॉक्टरों की स्थायी पदस्थापना आवश्यक नहीं है?
यदि जिला मुख्यालय की बात करें तो वहाँ दर्जन भर से अधिक अनुबंधित या बंधपत्र पर पदस्थ डॉक्टर मौजूद हैं, जिनमें से कई केवल औपचारिकता के तौर पर जिला चिकित्सालय में उपस्थिति दर्ज कराते हैं। इसके विपरीत, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र बतौली आज भी डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है, जो शासन की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) का पद भी यहाँ स्थायी रूप से भरा नहीं गया है। तत्कालीन बीएमओ डॉ. गणेश बैग के सेवानिवृत्त होने के पश्चात सीतापुर के बीएमओ डॉ. एस.एस. पैकरा को बतौली का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह व्यवस्था राज्य सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के दावों की पोल खोलती नजर आती है।
ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद यहाँ मरीजों की लंबी कतारें, आपातकालीन दुर्घटनाएँ, गंभीर बीमारियों के मामले और प्रसव से जुड़े केस लगातार सामने आते रहते हैं। बावजूद इसके, डॉक्टरों और स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य सुविधाएँ बदहाली झेल रही हैं। स्थिति और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि बतौली नगर एवं आसपास के क्षेत्र में कोई निजी क्लीनिक या वैकल्पिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे आमजन पूरी तरह इसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है।
जनता यह भी नहीं भूली है कि कोरोना महामारी के कठिन दौर में तत्कालीन बीएमओ डॉ. संतोष सिंह के नेतृत्व में बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन किया गया था और क्षेत्र के लोगों की जान बचाई गई थी। लेकिन यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि ऊँची और गंदी राजनीति के चलते उन्हें बीएमओ पद से हटाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ कर दिया गया।
आज हालात यह हैं कि सत्तासीन नेताओं को अपनी गाड़ियों और पद की चिंता तो है, लेकिन आमजन के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा केवल घोषणाओं और झूठे दावों तक सीमित होकर रह गई है।
ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर का नियमित पदस्थापन कब किया जाएगा?
ब्लॉक मुख्यालय की एकमात्र स्वास्थ्य व्यवस्था को उच्च स्तर की सुविधा कब मिल पाएगी?
यह विषय केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि हजारों नागरिकों के जीवन और अधिकार से जुड़ा गंभीर जनहित का मुद्दा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी और राज्य शासन इस पर कब और क्या संज्ञान लेते हैं।
Author: Chhattisgarhiya News
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