NMDC की चमक और धरातल का अंधेरा: मलंगीर जलप्रपात तक आज भी पक्की सड़क नसीब नहीं
दंतेवाड़ा। देश की नवरत्न कंपनी एनएमडीसी (NMDC) भले ही कागजों में विकास, मुनाफे और कॉर्पोरेट सफलता की मिसाल बन चुकी हो, लेकिन बस्तर की धरती पर इसकी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण दंतेवाड़ा जिले में स्थित मलंगीर जलप्रपात है, जो आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर मलंगीर जलप्रपात न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दराज़ से आने वाले पर्यटकों के लिए भी सुकून और शांति का केंद्र है। विडंबना यह है कि इसी जलप्रपात के जल संसाधनों का उपयोग एनएमडीसी अपने औद्योगिक कार्यों में करती है, जबकि यह क्षेत्र कंपनी के प्रभावित क्षेत्र (Project Affected Area) में आता है।
इसके बावजूद आज तक मुख्य सड़क से मलंगीर जलप्रपात तक एक ढंग की पक्की सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका है। पर्यटकों और ग्रामीणों को जोखिम भरे, ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर जाना पड़ता है। सवाल यह है कि जो कंपनी हजारों टन लौह अयस्क निकाल सकती है, क्या वह कुछ किलोमीटर सड़क भी नहीं बना सकती?
यह स्थिति गंभीर सवाल खड़े करती है—
क्या बस्तर केवल खनिज दोहन के लिए है?
क्या कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) सिर्फ कागजों और रिपोर्टों तक सीमित है?
जब मुनाफा करोड़ों में है, तो स्थानीय विकास कौड़ियों में क्यों?
मलंगीर जलप्रपात तक सड़क न होना केवल प्रशासनिक उदासीनता नहीं, बल्कि एनएमडीसी की सामाजिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने का भी प्रतीक है। बस्तर के मूल निवासी अपनी जल-जंगल-जमीन दे चुके हैं, वे कोई विलासिता नहीं, केवल सम्मानजनक जीवन और बुनियादी सुविधाएँ मांग रहे हैं।
एनएमडीसी यदि इस क्षेत्र के पानी और संसाधनों का उपयोग कर रही है, तो यहाँ के लोगों की राह आसान करना उसका नैतिक और सामाजिक दायित्व है।
विकास की असली पहचान खदानों की गहराई नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन में आई सुविधा और मुस्कान होनी चाहिए।
Author: Chhattisgarhiya News
सच्ची बात सिर्फ छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के साथ








