सरकारी नौकरियों में अनारक्षित (सामान्य) पदों पर चयन के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय का महत्त्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली/ माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) के पदों पर चयन पाने के पूर्णतः हकदार हैं, बशर्ते वे सामान्य वर्ग के निर्धारित कटऑफ अंक के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त करते हों। निर्णय की प्रमुख बातेंसामान्य/ओपन श्रेणी को किसी विशेष सामाजिक वर्ग के लिए आरक्षित कोटा नहीं माना जा सकता; यह सभी अभ्यर्थियों के लिए केवल योग्यता और मेरिट के आधार पर खुली श्रेणी है।यदि SC/ST/OBC/EWS अभ्यर्थी लिखित परीक्षा, साक्षात्कार आदि के कुल अंकों में सामान्य श्रेणी के अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक या समान अंक प्राप्त करते हैं, तो उन्हें सामान्य श्रेणी की रिक्तियों में समाहित किया जाएगा और उनका चयन उनके आरक्षित कोटे के विरुद्ध नहीं गिना जाएगा।जिन अभ्यर्थियों के अंक सामान्य श्रेणी के कटऑफ से कम होंगे, उन्हें उनके संबंधित आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC/EWS) की रिक्तियों के अंतर्गत ही समाहित किया जाएगा, जहाँ वे आरक्षण के लाभ के साथ विचारार्थ होंगे।संवैधानिक व नीति संबंधी निहितार्थन्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी में प्रवेश करने से किसी भी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को “डबल बेनिफिट” नहीं मिलता, क्योंकि यह समान अवसर और समानता के संवैधानिक सिद्धांत (अनुच्छेद 14 एवं 16) का प्रत्यक्ष अनुपालन है।यह फैसला देश भर की भर्ती एजेंसियों, विभागों व सार्वजनिक उपक्रमों को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करता है कि चयन प्रक्रिया में सामान्य श्रेणी की रिक्तियाँ सभी के लिए खुली हों और आरक्षित वर्ग के अधिक मेरिट वाले अभ्यर्थियों को उससे वंचित न किया जाए।भर्ती एजेंसियों हेतु निर्देशात्मक स्वरूपसभी विभागों/भर्ती बोर्डों/कर्मचारी चयन आयोगों आदि से अपेक्षा की जाती है कि वे:विज्ञापित रिक्तियों में सामान्य और आरक्षित श्रेणी के पदों पर चयन करते समय इस निर्णय के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट रूप से पालन सुनिश्चित करें।
चयन सूची तैयार करते समय यह विशेष रूप से दर्ज करें कि किन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन सामान्य श्रेणी की मेरिट सूची में हुआ है, ताकि आरक्षण के वास्तविक कोटे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यह निर्णय सामाजिक न्याय की भावना को बरक़रार रखते हुए प्रतिभाशाली एवं परिश्रमी अभ्यर्थियों के लिए अधिक अवसर सुनिश्चित करता है तथा भविष्य की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, न्यायसंगत और मेरिट आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Author: Chhattisgarhiya News
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