सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर भारत में बाढ़ और तबाही पर जताई गहरी चिंता, केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब
नई दिल्ली, सितंबर 2025।सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ से हुई व्यापक तबाही पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश श्री बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस विनाशकारी स्थिति के पीछे पहाड़ों में अवैध पेड़ों की कटाई को एक प्रमुख कारण बताया है।
पीठ ने केंद्र सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) तथा प्रभावित राज्यों को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों और वीडियो साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि बाढ़ में बहते लकड़ी के लट्ठे स्पष्ट संकेत हैं कि पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हो रही है। न्यायालय ने यह जानना चाहा है कि बाढ़ और भूस्खलन को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं,और भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए क्या ठोस योजनाएं बनाई गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है, क्योंकि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ से आपदाओं की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है।
न्यायालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई करें और समयबद्ध तरीके से जवाब प्रस्तुत करें।
Author: Chhattisgarhiya News
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