बलरामपुर : बलरामपुर जिले के कुसमी और शंकरगढ़ स्थित सहकारी बैंक शाखाओं में वित्तीय अनियमितताओं और गबन का मामला उजागर हुआ है। साल 2013 से 2022 के बीच हुए इस घोटाले में अधिकारियों और कर्मचारियों पर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर खाते खोलने और करोड़ों रुपए के गबन का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में 11 अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।
घोटाले का विवरण
- वित्तीय अनियमितता: पुलिस जांच के अनुसार, सहकारी बैंक शाखाओं में 26 करोड़ 74 लाख रुपए से अधिक की अनियमितता पाई गई।
- फर्जी दस्तावेज: विभिन्न फर्जी वाउचर और अन्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर के आधार पर फर्जी लेन-देन किए गए।
- जांच का दायरा: डीएमआर कैश अकाउंट, ग्राम पंचायतों के खाते, समितियों के केसीसी अकाउंट, एमटी लोन, गोडाउन लोन, निजी बचत खाते और नगद आहरण में भारी गड़बड़ी का पता चला है।
गिरफ्तार अधिकारी और कर्मचारी
- अशोक सोनी (सहायक मुख्य प्रवेक्षक)
- लक्ष्मण प्रसाद देवांगन (संस्था प्रबंधक)
- विजय उइके (संस्था प्रबंधक शंकरगढ़)
- तबारक अली (प्रभारी लिपिक)
- राजेंद्र पांडेय (प्रभारी अतिरिक्त प्रबंधक)
- सुदेश यादव (समिति सेवक शंकरगढ़)
- एतबल सिंह (सहायक मुख्य पर्यवेक्षक)
- प्रकाश कुमार सिंह (कंप्यूटर ऑपरेटर)
- जगदीश भगत (सहायक लेखापाल)
- सबल राय (शाखा प्रबंधक)
- विकास चंद्र पांडवी (वरिष्ठ पर्यवेक्षक)
पुलिस अधीक्षक का बयान
बलरामपुर के एसपी वैभव बैंकर ने बताया कि:
- घोटाले में शामिल सभी आरोपियों को चौबीस घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया।
- मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409, 420, 467, 468, 471, 120B, और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
- अन्य बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच जारी है।
आगे की कार्यवाही
जांच की प्रक्रिया अभी भी जारी है। पुलिस अधीक्षक ने यह भी बताया कि अन्य संबंधित व्यक्तियों और दस्तावेज़ों की जांच के बाद घोटाले में शामिल अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई से सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने की उम्मीद है।
Author: Chhattisgarhiya News
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